जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली के तहत पहला OTP खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जबकि दूसरा OTP उस व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर जाएगा जिसे खाताधारक ने अपने विश्वसनीय संपर्क यानी “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” के रूप में चुना होगा। यह संपर्क आमतौर पर परिवार का कोई सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति होता है। जब तक दोनों OTP की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक कोई भी वित्तीय लेनदेन पूरा नहीं किया जा सकेगा।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वरिष्ठ नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी न हो सके। कई बार देखा गया है कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, लिंक या खुद को अधिकारी बताकर लोगों से बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। ऐसे मामलों में बुजुर्ग अधिक असुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि वे तकनीकी धोखाधड़ी को तुरंत पहचान नहीं पाते। डबल OTP सिस्टम इस खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा।
फिलहाल इस व्यवस्था को सीमित स्तर पर लागू किया गया है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ बैंकों में शुरू किया गया है। शुरुआती चरण में चुनिंदा शाखाओं को इसमें शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक ग्राहकों के लिए इस नई सुविधा का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण सफल रहने के बाद इसे धीरे-धीरे अन्य बैंकों में भी लागू किए जाने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे न केवल धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि परिवार के सदस्यों की भागीदारी भी वित्तीय सुरक्षा में बढ़ेगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सुरक्षा के साथ-साथ सिस्टम को सरल बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े।
डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में यह डबल OTP सिस्टम एक अतिरिक्त सुरक्षा परत की तरह काम करेगा, जिससे बिना दूसरी पुष्टि के कोई भी बड़ा लेनदेन संभव नहीं होगा। इससे ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी लेनदेन जैसे मामलों पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
