भारतीय टीम के लिए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया दुनिया की सबसे मजबूत हॉकी टीमों में गिनी जाती है। ऐसे में इन मुकाबलों से भारतीय खिलाड़ियों को अपनी रणनीति, फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन को परखने का बेहतरीन अवसर मिलेगा। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में 15 से 21 जून तक होने वाले एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप 2026 में हिस्सा लेगी।
दौरे पर रवाना होने से पहले कप्तान सलीमा टेटे ने टीम के आत्मविश्वास और तैयारियों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूरी टीम इस दौरे का लंबे समय से इंतजार कर रही थी और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उनके घरेलू मैदान पर खेलना हमेशा एक बड़ी चुनौती होती है।
सलीमा ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में टीम ने बेहद कठिन ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया है। इस दौरान खिलाड़ियों ने फिटनेस, तकनीकी मजबूती और टीम कॉम्बिनेशन पर काफी मेहनत की है। उनके मुताबिक टीम अब पहले से अधिक संतुलित और एकजुट नजर आ रही है और पर्थ में होने वाले मुकाबले खिलाड़ियों को अपनी तैयारियों को वास्तविक मुकाबलों में परखने का अवसर देंगे।
भारतीय कप्तान ने यह भी माना कि आने वाले महीनों में टीम के सामने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट हैं, इसलिए यह दौरा बेहद अहम साबित होगा। एफआईएच नेशंस कप के बाद भारतीय टीम को वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स जैसे बड़े आयोजनों में भी हिस्सा लेना है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच टीम के लिए मानसिक और तकनीकी दोनों स्तर पर तैयारी का महत्वपूर्ण चरण माने जा रहे हैं।
सलीमा टेटे ने कहा कि टीम नेशंस कप में लय और आत्मविश्वास के साथ उतरना चाहती है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम भारतीय खिलाड़ियों को उनकी क्षमता की सीमा तक चुनौती देगी, जिससे टीम को अपनी कमजोरियों को पहचानने और और अधिक मजबूत बनने का मौका मिलेगा।
भारतीय महिला हॉकी टीम इस दौरे के जरिए न केवल अपनी तैयारियों को धार देने की कोशिश करेगी, बल्कि आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए मजबूत आधार तैयार करने पर भी फोकस करेगी। खेल प्रेमियों की नजरें अब पर्थ में होने वाले इन मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां भारतीय टीम अपने प्रदर्शन से नई उम्मीदें जगाने उतरेगी।
