इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने भी सुधारों का समर्थन करते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को ठीक से नहीं दर्शातीं और इनमें बदलाव “अनिवार्य” है।
UNSC का मौजूदा ढांचा
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य हैं:
अमेरिका
रूस
चीन
फ्रांस
यूनाइटेड किंगडम
इन सभी के पास वीटो पावर है, जो किसी भी प्रस्ताव को रोक सकती है। इसके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं जिन्हें 2 साल के लिए चुना जाता है।
G4 का नया प्रस्ताव क्या है?
भारत और उसके सहयोगी देशों (G4) ने एक नया प्रस्ताव दिया है जिसमें शामिल हैं:
UNSC का विस्तार कर 25–26 सदस्य करना
11 स्थायी सदस्य बनाने का सुझाव
नए सदस्यों को तुरंत वीटो पावर न देना
लगभग 15 साल का “ट्रांजिशन पीरियड” जिसमें वीटो फ्रीज रहेगा
समान जिम्मेदारी और जवाबदेही का ढांचा
भारत की ओर से इस मुद्दे पर राजनयिक स्तर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
भारत की राह में सबसे बड़ी बाधा कौन?
विश्लेषण के अनुसार भारत की स्थायी सदस्यता की राह में सबसे बड़ा अवरोध है:
चीन
एशिया में केवल वही एकमात्र वीटो पावर वाला देश है
वह नहीं चाहता कि भारत जैसे नए प्रतिस्पर्धी को स्थायी सीट मिले
UNSC विस्तार पर अक्सर विरोध या बाधा डालता रहा है
पाकिस्तान
भारत की सदस्यता का खुला विरोध करता है
चीन के साथ मिलकर कई कूटनीतिक प्रयासों में रुकावट डालता है
मुद्दा क्यों अटका हुआ है?
UNSC सुधार के लिए:
सभी स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी है
किसी एक देश का वीटो भी पूरी प्रक्रिया रोक सकता है
यही वजह है कि लंबे समय से सुधार प्रस्ताव अटके हुए हैं, जबकि भारत जैसे बड़े देशों की भूमिका वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रही है।
