इस डील का सबसे अहम पहलू “सोर्स कोड और सिस्टम कंट्रोल” को लेकर भारत की लंबे समय से चली आ रही चिंता से जुड़ा है। नए F4+ कॉन्फ़िगरेशन में भारत को अधिक स्वतंत्रता देने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारतीय सिस्टम्स को विमान के नेटवर्क और हथियार इकोसिस्टम में गहराई से जोड़ा जा सके।
भारत-केंद्रित “F4+ वेरिएंट” की संभावित खासियतें
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित F4+ संस्करण को केवल NATO-आधारित इंटरऑपरेबिलिटी के बजाय दक्षिण एशिया के हाई-इंटेंसिटी वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें शामिल हो सकते हैं:
भारतीय हथियार प्रणालियों का बेहतर एकीकरण
उपग्रह आधारित संचार और स्वदेशी डेटा लिंक
भारतीय वायुसेना की IACCS (Integrated Air Command and Control System) से सीधा कनेक्शन
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर सिस्टम में कस्टमाइजेशन
स्टील्थ टारगेट्स पर फोकस
इस अपग्रेड का एक बड़ा फोकस भविष्य के स्टील्थ खतरों से निपटना बताया जा रहा है, जैसे कि चीन का Chengdu J-20। F4+ में रडार और सेंसर प्रोसेसिंग को इस तरह अपग्रेड करने की बात कही जा रही है कि कम विजिबिलिटी वाले लक्ष्यों को भी ट्रैक और एंगेज किया जा सके।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में बढ़त
Rafale के साथ आने वाला SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम पहले से ही एक एडवांस सूट माना जाता है। प्रस्तावित बदलावों के तहत भारत को अपनी “थ्रेट लाइब्रेरी” जोड़ने की अधिक क्षमता मिल सकती है, जिससे भारतीय रडार और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस डेटा सीधे सिस्टम में फीड किया जा सकेगा।इसका मतलब होगा कि भारत अपने क्षेत्रीय खतरों (जैसे पाकिस्तान और चीन के रडार सिग्नेचर) को ज्यादा बेहतर तरीके से पहचान और ट्रैक कर सकेगा।
