ट्विशा के ससुराल पक्ष की ओर से पूर्व जज गिरीबाला सिंह और उनके वकील ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख तो है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चोटें कहां और कितनी गंभीर थीं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को सनसनी फैलाने के उद्देश्य से पेश किया गया प्रतीत होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोबारा पोस्टमॉर्टम या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
इस मामले में एक और बड़ा विवाद उस समय सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि कथित फांसी में इस्तेमाल की गई बेल्ट को पोस्टमॉर्टम के समय जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया था। बाद में बेल्ट जांच के लिए दी गई, लेकिन तब तक वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हो सका। इसी कारण गर्दन पर मिले निशानों का सही विश्लेषण अधूरा रह गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
परिजनों का आरोप है कि जांच में गंभीर लापरवाही हुई है और उन्होंने मामले को मध्य प्रदेश से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी या दिल्ली AIIMS में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की है। परिजन यह भी दावा कर रहे हैं कि देरी से FIR दर्ज हुई और कई अहम सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं किया गया।
वहीं दूसरी ओर ससुराल पक्ष का कहना है कि आरोप पूरी तरह से एकतरफा हैं। उनका दावा है कि ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और कई व्यक्तिगत कारणों से परेशान थीं। सास गिरीबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ट्विशा ने स्वयं गर्भपात कराया था, जिसके बाद वह डिप्रेशन में चली गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने हमेशा उसे संभालने की कोशिश की।
इस पूरे मामले में पुलिस ने बताया है कि आरोपी समर्थ सिंह की तलाश के लिए 6 टीमें बनाई गई हैं और उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
इस बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी मामला गर्मा गया है। भोपाल में सीएम हाउस के बाहर परिजनों ने प्रदर्शन कर न्याय की मांग की। दूसरी ओर ससुराल पक्ष ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
फिलहाल ट्विशा की मौत का रहस्य और गहराता जा रहा है। एक तरफ परिजन इसे सुनियोजित हत्या बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ससुराल पक्ष इसे मानसिक तनाव और व्यक्तिगत परिस्थितियों का परिणाम बता रहा है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सच को सामने लाने की है।
