नई दिल्ली । देशभर में 20 मई को दवा दुकानों की हड़ताल होने जा रही है, जिसके चलते कई राज्यों में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स द्वारा घोषित इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण ई-फार्मेसी और इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़े मौजूदा नियम स्पष्ट नहीं हैं और इसी का फायदा उठाकर कई प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी के काम कर रहे हैं।
केमिस्ट संगठनों का आरोप है that ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां प्रिस्क्रिप्शन की सही जांच के बिना दवाएं उपलब्ध करा रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि कई मामलों में बिना उचित सत्यापन के दवाओं की बिक्री हो रही है और इससे दवा वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
इस विरोध का केंद्र दो प्रमुख नोटिफिकेशन GSR 220(E) और GSR 817(E) हैं, जिन्हें लेकर संगठन लगातार सरकार से पुनर्विचार की मांग कर रहा है। केमिस्ट संगठनों के अनुसार, इन प्रावधानों ने ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों को एक ऐसे कानूनी ढांचे में काम करने की अनुमति दी है, जहां स्पष्ट जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था का अभाव है।
संगठन का कहना है कि GSR 817(E) कई वर्षों पहले एक मसौदा नियम के रूप में सामने आया था, जिसमें ई-फार्मेसी संचालन के लिए पंजीकरण, प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन और दवा वितरण से जुड़े दिशा-निर्देश प्रस्तावित किए गए थे। हालांकि इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया और न ही औपचारिक रूप से वापस लिया गया। इसी वजह से ऑनलाइन फार्मेसी क्षेत्र में अब तक स्पष्ट कानूनी स्थिति नहीं बन पाई है।
दूसरी ओर GSR 220(E) को महामारी के दौरान आपातकालीन व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था ताकि दवाओं की होम डिलीवरी संभव हो सके। लेकिन अब पारंपरिक केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि कई ऑनलाइन कंपनियां इसी व्यवस्था का इस्तेमाल स्थायी मॉडल की तरह कर रही हैं, जबकि इसके लिए अलग और स्पष्ट नियामक ढांचा मौजूद नहीं है।
केमिस्ट संगठनों ने यह भी कहा है कि बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियां भारी छूट और आक्रामक मूल्य निर्धारण के जरिए बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं। उनका तर्क है कि छोटे और पारंपरिक मेडिकल स्टोर इतने बड़े डिस्काउंट देने की स्थिति में नहीं होते, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।
हालांकि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन फार्मेसी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बन चुकी हैं और उन्हें पूरी तरह रोकने के बजाय मजबूत नियमन की आवश्यकता है। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म मरीजों तक दवाएं जल्दी पहुंचाने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षा और सत्यापन के सख्त नियम जरूरी हैं।
फिलहाल हड़ताल को लेकर कई राज्यों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और यदि इसमें व्यापक भागीदारी होती है तो एक दिन के लिए दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नियमित दवाएं लेने वाले मरीजों को पहले से आवश्यक दवाएं खरीद लेने की सलाह दी जा रही है।
