टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, ज्यादातर वायरलेस ईयरबड्स में एक साइड “मेन ईयरबड” की तरह काम करता है, जो सीधे फोन से कनेक्शन बनाए रखता है। यही साइड कॉलिंग, माइक्रोफोन और कंट्रोल का ज्यादा इस्तेमाल संभालता है, जिससे उस पर ज्यादा लोड पड़ता है और उसकी बैटरी दूसरे ईयरबड की तुलना में जल्दी खत्म होने लगती है। इसके अलावा अगर कोई यूजर अक्सर सिर्फ एक ही ईयरबड का इस्तेमाल करता है, तो उस साइड की बैटरी समय के साथ जल्दी कमजोर हो सकती है।
इसके अलावा एक और बड़ी वजह बैटरी की उम्र भी होती है। जैसे-जैसे ईयरबड्स पुरानी होते जाते हैं, उनकी छोटी बैटरियों की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे एक साइड पहले डिस्चार्ज होने लगता है या ठीक से काम नहीं करता।
कई बार समस्या ईयरबड में नहीं बल्कि उसकी चार्जिंग में भी होती है। ईयरबड के चार्जिंग पिन या केस में धूल, गंदगी या ईयरवैक्स जमा हो जाता है, जिससे एक ईयरबड ठीक से चार्ज नहीं हो पाता। ऐसे में वह डेड दिखने लगता है। इस स्थिति में ईयरबड और चार्जिंग केस को साफ, सूखे और मुलायम कपड़े या कॉटन स्वैब से हल्के हाथों से साफ करना चाहिए। ध्यान रखना जरूरी है कि पानी का इस्तेमाल न किया जाए।
इसके बाद दोनों ईयरबड्स को चार्जिंग केस में रखकर रीसेट करना भी एक असरदार तरीका है। कई कंपनियों के ईयरबड्स में रीसेट या री-पेयरिंग का ऑप्शन होता है, जिससे कनेक्शन और सिंकिंग से जुड़ी समस्याएं ठीक हो जाती हैं।
अगर फिर भी समस्या बनी रहती है तो फोन की ब्लूटूथ सेटिंग्स को चेक करना जरूरी है। कई बार फोन में ईयरबड को “Forget Device” करके दोबारा पेयर करने से ऑडियो और बैटरी से जुड़ी दिक्कतें खत्म हो जाती हैं। साथ ही फोन और ईयरबड दोनों के सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर अपडेट करना भी फायदेमंद होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईयरबड्स की बैटरी लाइफ को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ गलतियों से बचना चाहिए, जैसे उन्हें पूरी रात चार्जिंग पर लगाकर छोड़ना, बहुत गर्म जगह पर इस्तेमाल करना या हमेशा एक ही ईयरबड का लगातार उपयोग करना। दोनों ईयरबड्स का बराबर इस्तेमाल करने से उनकी बैटरी बैलेंस बनी रहती है और परफॉर्मेंस बेहतर रहती है।
इस तरह थोड़ी सावधानी और आसान ट्रिक्स अपनाकर ईयरबड्स की ज्यादातर आम समस्याओं को घर बैठे ही ठीक किया जा सकता है और नए खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।
