राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में भी जनहित और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राष्ट्रपति ने उनके योगदान को देश और विशेष रूप से उत्तराखंड के विकास के लिए अविस्मरणीय बताया।
देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी खंडूरी के निधन को अपूरणीय क्षति करार दिया। नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अनुशासन और राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखा। उनकी साफ-सुथरी छवि और जनसेवा के प्रति समर्पण उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता था। उत्तराखंड में उनके कार्यकाल को सुशासन और विकास के लिए आज भी याद किया जाता है।
भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक पूर्व सैनिक भी थे जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सार्वजनिक जीवन में भी उसी अनुशासन और ईमानदारी को बनाए रखा। उनके नेतृत्व में कई विकास कार्यों को गति मिली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए।
राजनीतिक जीवन में उनकी छवि एक सादगीपूर्ण और कर्मठ नेता की रही। उन्होंने हमेशा साफ राजनीति और जनहित को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का सम्मान करते थे। उनके निधन के बाद देशभर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला लगातार जारी है।
उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद्र खंडूरी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा और सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी तथा ईमानदारी हमेशा उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।
