दरअसल कंप्रेसर किसी भी AC या फ्रिज का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है। जैसे स्मार्टफोन में प्रोसेसर काम करता है, उसी तरह कंप्रेसर कूलिंग सिस्टम की पूरी क्षमता को नियंत्रित करता है। बिना कंप्रेसर के AC और फ्रिज काम ही नहीं कर सकते। सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए आयात कम करना चाहती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि भारत में फिलहाल इतनी उत्पादन क्षमता मौजूद नहीं है कि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के मुताबिक अचानक आयात सीमित होने से प्रोडक्शन यूनिट्स में जरूरी कंपोनेंट्स की कमी हो सकती है। इससे नई मशीनों की असेंबलिंग प्रभावित होगी और बाजार में सप्लाई घट सकती है। कंपनियों ने यह भी कहा कि नए वेंडर्स या घरेलू सप्लायर को शामिल करना आसान नहीं होता। किसी भी नए कंप्रेसर को इस्तेमाल करने से पहले लंबी टेस्टिंग, सेफ्टी चेक, एफिशिएंसी टेस्ट और लैब सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कई महीने लग सकते हैं।
इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर आम ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है। खासकर 5-स्टार इनवर्टर AC, स्मार्ट रेफ्रिजरेटर और AI आधारित कूलिंग अप्लायंसेज की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। कंपनियों का कहना है कि लॉजिस्टिक्स खर्च, नए सप्लायर्स की टेस्टिंग और सीमित स्टॉक के कारण कीमतें बढ़ेंगी। ऐसे में इस गर्मी ग्राहकों को न सिर्फ ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं, बल्कि पसंद के मॉडल मिलने में भी दिक्कत आ सकती है।
