15 साल बाद आयोजित इस महायज्ञ के लिए खेतों के बीच मिनी महाकुंभ जैसी व्यवस्था की गई है, जहां 225 क्विंटल हवन सामग्री से आहुति दी जाएगी और 151 वेदियों पर यज्ञ संपन्न होगा। आयोजन स्थल पर 200 ट्रॉली बांस और घास से मंडप, कुटियां और परिक्रमा मार्ग तैयार किए गए हैं, जबकि निर्माण में किसी भी हरे पेड़ को नहीं काटा गया।
कार्यक्रम में करीब 15 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई है, जिनके लिए भोजनशाला और आवास की व्यवस्था की गई है। यहां 108 मंडपों में रामचरितमानस और भागवत पाठ के साथ-साथ प्रतिदिन शिवलिंग निर्माण भी चल रहा है, जिसका लक्ष्य सवा करोड़ शिवलिंग बनाना है।
गुड्डा महाराज के नेतृत्व में चल रहे इस आयोजन में 250 से अधिक स्वयंसेवक और कारीगर लगातार सेवा कार्य में जुटे हैं। प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर इसे विश्व कल्याण का बड़ा अनुष्ठान बताया जा रहा है।
