यह पूरा मामला 14 मई का बताया जा रहा है, जब एलएंडटी कंपनी प्रबंधन की ओर से पाइप चोरी की लिखित शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि चोरी की घटना सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी और इसमें एक संगठित गिरोह की भूमिका हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय मुखबिर तंत्र की मदद से जांच को आगे बढ़ाया।
लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे, जिनके आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद विशेष टीम ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और बताया कि उन्होंने तुमड़ीखेड़ा क्षेत्र के पास से एलएंडटी कंपनी के पाइप चोरी किए थे। आरोपियों के बयान और उनकी निशानदेही के आधार पर पुलिस ने चोरी किया गया पूरा सामान बरामद कर लिया।
हालांकि पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस चोरी की घटना में कुल सात लोग शामिल थे, जिनमें से चार आरोपी अभी फरार हैं। बताया जा रहा है कि ये फरार आरोपी चोरी के माल को खरीदने और उसे आगे बेचने के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इस पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल एक चोरी के मामले का खुलासा नहीं है, बल्कि एक संभावित संगठित अपराध नेटवर्क की ओर भी इशारा करती है। इसलिए जांच को और व्यापक किया जा रहा है ताकि इस पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचा जा सके। कांटाफोड़ थाना प्रभारी के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई को पुलिस की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसने न केवल चोरी का खुलासा किया बल्कि त्वरित कार्रवाई से माल भी बरामद कर लिया।
इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और औद्योगिक इकाइयों की निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी और पूरे मामले का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
