आर्किटेक्ट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं कक्षा PCM यानी Physics, Chemistry और Mathematics विषयों के साथ पास करना जरूरी होता है। इसके बाद छात्रों को B.Arch यानी बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कोर्स में एडमिशन लेना होता है। यह 5 साल का प्रोफेशनल डिग्री कोर्स है, जिसे पूरा करने के बाद छात्र आर्किटेक्ट के रूप में करियर शुरू कर सकते हैं।
देश के प्रतिष्ठित आर्किटेक्चर कॉलेजों में दाखिले के लिए NATA (National Aptitude Test in Architecture) और JEE Main Paper 2 जैसी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इन परीक्षाओं में छात्रों की ड्रॉइंग स्किल, क्रिएटिविटी, लॉजिकल सोच और गणितीय क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। अच्छे स्कोर के आधार पर छात्रों को टॉप सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में प्रवेश मिलता है।
आर्किटेक्चर की पढ़ाई के दौरान छात्रों को बिल्डिंग डिजाइन, ड्राफ्टिंग, 3D मॉडलिंग, अर्बन प्लानिंग, इंटीरियर डिजाइन और कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी जैसी कई चीजें सिखाई जाती हैं। इसके साथ ही आज के डिजिटल दौर में AutoCAD, Revit, SketchUp, BIM और 3D Visualization जैसे सॉफ्टवेयर की जानकारी होना बेहद जरूरी माना जाता है। जिन छात्रों की डिजाइनिंग और टेक्निकल स्किल मजबूत होती है, उन्हें बेहतर अवसर आसानी से मिल जाते हैं।
इस फील्ड में सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी और क्रिएटिव सोच भी बेहद अहम होती है। एक सफल आर्किटेक्ट को क्लाइंट की जरूरत समझकर डिजाइन तैयार करना होता है, इसलिए प्रेजेंटेशन और प्लानिंग स्किल्स भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
डिग्री पूरी करने के बाद छात्र आर्किटेक्चर फर्म, रियल एस्टेट कंपनियों, सरकारी विभागों, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में नौकरी कर सकते हैं। कई छात्र अनुभव लेने के बाद अपना खुद का आर्किटेक्चर स्टूडियो या डिजाइन कंसल्टेंसी भी शुरू करते हैं।
अगर सैलरी की बात करें तो शुरुआती दौर में एक फ्रेशर आर्किटेक्ट को सालाना 3 लाख से 6 लाख रुपए तक का पैकेज मिल सकता है। वहीं अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह कमाई 10 लाख रुपए सालाना या उससे भी अधिक पहुंच सकती है। विदेशों में भी भारतीय आर्किटेक्ट्स की काफी डिमांड रहती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में ग्रीन बिल्डिंग, सस्टेनेबल डिजाइन और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते ट्रेंड के कारण आर्किटेक्चर सेक्टर में करियर के अवसर तेजी से बढ़ने वाले हैं। ऐसे में क्रिएटिव और टेक्निकल सोच रखने वाले छात्रों के लिए यह फील्ड सुनहरा भविष्य साबित हो सकती है।
