नेपाल में दशैन, तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान चीनी की खपत तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में भारत से सप्लाई बाधित होने पर बाजार में कमी और कीमतों में उछाल की स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही मौसम और कृषि उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में यह कदम नेपाल की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के इस फैसले से नेपाली बाजारों में अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। नेपाल के अधिकारी भी मानते हैं कि भारत के व्यापारिक फैसलों का सीधा असर उनकी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, क्योंकि नेपाल कई जरूरी वस्तुओं के लिए भारत पर निर्भर है।
नेपाल के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सप्लाई स्रोत तलाशने की कोशिश करेंगे। साथ ही भारत से सरकारी स्तर पर बातचीत की संभावना भी जताई गई है, ताकि त्योहारों के समय आवश्यक आपूर्ति बाधित न हो।
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स और सीमित विकल्प हैं। भारत के अलावा अन्य देशों से आयात करना महंगा साबित होता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ता है। इसी वजह से नेपाल की खाद्य सुरक्षा नीति को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले महीनों में नेपाल में चीनी की कमी और महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं।
