दरअसल, भारत में हर साल लाखों टन फल और सब्जियां खराब हो जाती हैं क्योंकि गांवों और छोटे कस्बों में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होती। किसानों को मजबूरी में अपनी फसल कम दाम पर बेचनी पड़ती है। इसी समस्या को देखते हुए ‘सब्जीकोठी’ तैयार की गई। यह डिवाइस पारंपरिक फ्रिज की तरह लगातार बिजली पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि एक खास कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर टेक्नोलॉजी पर काम करता है।
इस तकनीक में पानी को ऑक्सीडाइज कर कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन और वाष्प में बदला जाता है। साथ ही यह डिवाइस फल और सब्जियों से निकलने वाली एथिलीन गैस को खत्म करता है। यही गैस फलों और सब्जियों को जल्दी पकाने और सड़ाने का कारण बनती है। जब एथिलीन गैस नियंत्रित हो जाती है तो सब्जियों की शेल्फ लाइफ कई गुना बढ़ जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डिवाइस में रखी सब्जियां 3 दिन से लेकर 30 दिन तक ताजा रह सकती हैं।
सब्जीकोठी की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद कम बिजली खपत है। जहां एक सामान्य फ्रिज लगातार बिजली खर्च करता है, वहीं यह डिवाइस बहुत कम ऊर्जा में काम कर जाता है। इसे सोलर पैनल से भी आसानी से चलाया जा सकता है। यही वजह है कि बिजली की कमी वाले गांवों और दूरदराज इलाकों में भी इसका इस्तेमाल संभव है।
यह डिवाइस पोर्टेबल भी है। इसे आसानी से खोलकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। किसान इसे ई-रिक्शा, ठेले या छोटे वाहन पर रखकर सीधे खेत से मंडी तक ले जा सकते हैं। इसकी स्टोरेज क्षमता भी सामान्य घरेलू फ्रिज से कई गुना ज्यादा बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। फसल खराब होने से बचने पर किसानों को अपनी उपज सही समय और सही कीमत पर बेचने का मौका मिलेगा। यही नहीं, इससे खाद्य बर्बादी भी कम होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत वाला आधुनिक कोल्ड स्टोरेज विकल्प उपलब्ध हो सकेगा। ‘सब्जीकोठी’ अब एग्री-टेक सेक्टर में भारत के सबसे चर्चित इनोवेशन में से एक बनती जा रही है।
