रिपोर्ट्स के मुताबिक जब यूजर्स “Claude download for Mac” या इससे जुड़े कीवर्ड सर्च करते हैं, तो उन्हें कुछ फर्जी विज्ञापन और संदिग्ध लिंक दिखाई देते हैं। ये लिंक देखने में असली डाउनलोड वेबसाइट जैसे लगते हैं, लेकिन उन पर क्लिक करते ही यूजर एक ऐसे वेबपेज पर पहुंच जाता है जहां मालवेयर छिपा होता है। डाउनलोड या इंस्टॉल प्रक्रिया शुरू होते ही सिस्टम संक्रमित हो सकता है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें इस्तेमाल किया जा रहा मालवेयर “मेमोरी-बेस्ड” तकनीक पर काम करता है। यानी यह सिस्टम की मेमोरी में रन करता है और हार्ड डिस्क पर आसानी से दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि कई एंटीवायरस प्रोग्राम भी शुरुआती स्तर पर इसे पकड़ नहीं पाते।
Claude AI की बढ़ती लोकप्रियता का फायदा उठाकर स्कैमर्स लोगों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के महीनों में Claude AI और दूसरे AI टूल्स को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है, जिसके कारण साइबर अपराधियों ने नकली डाउनलोड लिंक, पॉप-अप विज्ञापन और फर्जी वेबसाइट्स बनाना शुरू कर दिया है।
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार मालवेयर का इस्तेमाल सिस्टम की जानकारी चुराने, पासवर्ड हासिल करने, बैंकिंग डेटा एक्सेस करने या डिवाइस को पूरी तरह कंट्रोल करने के लिए किया जा सकता है। कई बार ये मालवेयर बैकग्राउंड में काम करते रहते हैं और यूजर को लंबे समय तक इसका पता भी नहीं चलता।
विशेषज्ञों ने यूजर्स को सलाह दी है कि इंटरनेट ब्राउज करते समय किसी भी संदिग्ध विज्ञापन, पॉप-अप या अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। किसी भी ऐप या सॉफ्टवेयर को हमेशा उसके आधिकारिक स्रोत से ही डाउनलोड करें। इसके अलावा ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट रखना भी जरूरी है ताकि सुरक्षा खामियों का फायदा न उठाया जा सके।
साइबर सुरक्षा के लिए एड-ब्लॉकर और सिक्योरिटी एक्सटेंशन का इस्तेमाल भी मददगार माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के समय में सिर्फ ईमेल या मैसेज ही नहीं, बल्कि साधारण Google Search भी साइबर हमलों का जरिया बन सकता है, इसलिए इंटरनेट इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।
