मामला तब और गंभीर हो गया जब मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चार मंत्री सहयोगियों ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे सरकार के भीतर अस्थिरता और बढ़ गई है। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कीर स्टार्मर 2029 में होने वाले अगले आम चुनाव तक लेबर पार्टी का नेतृत्व बनाए रख पाएंगे या नहीं। यह सवाल अब पार्टी के अंदर एक बड़े राजनीतिक संकट के रूप में उभर चुका है।
ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि विदेश सचिव यवेट कूपर और गृह मंत्री शबाना महमूद जैसे वरिष्ठ नेताओं सहित कई कैबिनेट मंत्रियों ने स्टार्मर से आग्रह किया है कि वे चुनावी हार के बाद नेतृत्व में बदलाव या सत्ता के सुचारू हस्तांतरण पर विचार करें। हालांकि बढ़ते दबाव और पार्टी के भीतर बगावत जैसी स्थिति के बावजूद कीर स्टार्मर ने स्पष्ट रूप से इस्तीफे की मांगों को खारिज कर दिया है।
लंदन में पार्टी समर्थकों को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा कि उन्हें पता है कि उन पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन वे अपने नेतृत्व पर विश्वास बहाल करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वह आलोचनाओं को गंभीरता से लेते हैं, लेकिन अपने पद से पीछे हटने के बजाय सुधार और मजबूती की दिशा में काम करेंगे।
यह पूरा राजनीतिक विवाद उस समय और गहरा गया है जब इंग्लैंड के काउंसिल चुनावों में लेबर पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा स्कॉटलैंड और वेल्स में भी पार्टी को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा है। वेल्स में तो लेबर पार्टी ने 1999 के बाद पहली बार वेल्श संसद पर अपना नियंत्रण भी खो दिया है, जिससे पार्टी की लोकप्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
गौरतलब है कि कीर स्टार्मर जुलाई 2024 में एक बड़ी जीत के साथ सत्ता में आए थे, जब उन्होंने 14 साल से सत्ता में रही कंजर्वेटिव पार्टी को हराकर सरकार बनाई थी। लेकिन सत्ता में आने के बाद से ही उन्हें आर्थिक ठहराव, बढ़ती महंगाई और कई राजनीतिक विवादों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों ने उनकी सरकार की लोकप्रियता पर असर डाला है और अब चुनावी हार ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
अपने नेतृत्व को मजबूत करने की कोशिश में स्टार्मर ने अपनी सरकार की नीतियों में बड़े बदलाव का वादा किया है। उन्होंने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुधारों को लागू करने और यूरोपीय देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है। हालांकि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के चलते उनका आगे का राजनीतिक रास्ता चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले समय में लेबर पार्टी की दिशा और नेतृत्व दोनों पर बड़ा फैसला हो सकता है।
