देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक के शेयरों में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है। यह दबाव खास तौर पर कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद बढ़ा है, जहां प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं माना गया। नतीजों के बाद निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और इसका सीधा असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। लगातार दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक करीब दस प्रतिशत तक गिर चुका है, जिससे बाजार में इस बैंकिंग दिग्गज को लेकर चिंता का माहौल बन गया है।
शेयर में आई इस गिरावट के बीच कई प्रमुख संस्थागत विश्लेषकों ने अपने अनुमान में बदलाव किया है। कुछ ने स्टॉक की रेटिंग को घटाते हुए इसे लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाया है। उनका मानना है कि आने वाले समय में बैंक के रिटर्न प्रोफाइल पर दबाव देखा जा सकता है, खासकर तब जब क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा, नए अकाउंटिंग नियमों के प्रभाव से भी बैंक के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
एक प्रमुख वैश्विक विश्लेषण संस्था ने अपने पहले के सकारात्मक रुख को बदलते हुए अब इसे स्थिर दृष्टिकोण में रखा है। साथ ही शेयर के लिए तय किए गए मूल्य लक्ष्य को भी घटा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्तरों पर वैल्यूएशन में बड़े सुधार की गुंजाइश सीमित दिख रही है। अनुमान यह भी लगाया गया है कि बैंक की संपत्ति पर रिटर्न भविष्य में कुछ दबाव में रह सकता है, जिससे निवेशकों की उम्मीदें थोड़ी कम हो सकती हैं।
वहीं दूसरी ओर, कुछ अन्य विश्लेषक अभी भी इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि बैंक की मजबूत लोन ग्रोथ आगे चलकर स्थिति को संतुलित कर सकती है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि निकट भविष्य में मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट जैसे कारक चुनौती पेश कर सकते हैं। उनके अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो ताजा नतीजों के बाद इस बैंकिंग शेयर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां कुछ विशेषज्ञ आगे दबाव की आशंका जता रहे हैं, वहीं कुछ इसे लंबी अवधि के नजरिए से स्थिर निवेश मान रहे हैं। फिलहाल बाजार की नजर आने वाले तिमाही प्रदर्शन और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो इस स्टॉक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
