सूदखोरी के जाल में फंसते रहे लो
वारासिवनी क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे कथित सूदखोरी के नेटवर्क का अब बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी अनिल अरोरा पर आरोप है कि वह आम लोगों के साथ-साथ नौकरीपेशा वर्ग को भी ऊंचे ब्याज दरों पर कर्ज देकर शोषण करता था। बताया जा रहा है कि वह 10 से 15 प्रतिशत तक ब्याज वसूलता था, जिससे कई लोग कर्ज के जाल में फंसते चले गए।
छापेमारी में मिले चौंकाने वाले दस्तावे
पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपी के ठिकानों से बड़ी संख्या में खाली चेक, जमीन की रजिस्ट्री और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। ये दस्तावेज कथित तौर पर उसके संगठित अवैध कारोबार की ओर इशारा करते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था।
आदिवासियों की जमीन पर कब्जे का आरो
मामले में सबसे गंभीर आरोप आदिवासी समुदाय की जमीनों को हड़पने का है। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ने कुछ लोगों के नाम का उपयोग कर आदिवासियों से सस्ते दामों पर जमीन खरीदी। इसके बाद उन्हीं जमीनों को बड़े कॉलोनाइजरों और गैर-आदिवासियों को ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया। अब तक इस तरह की करीब 6 रजिस्ट्रियां पुलिस के हाथ लगी हैं।
कोर्ट ने भेजा जेल, जांच में बढ़ी सख्त
शनिवार को कोर्ट ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजते हुए जेल भेज दिया। पुलिस अब उसके बैंक खातों और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है ताकि अवैध कमाई का पूरा नेटवर्क सामने आ सके। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला न केवल सूदखोरी की गंभीर समस्या को उजागर करता है, बल्कि आदिवासी भूमि के अवैध लेन-देन और संगठित आर्थिक अपराध की ओर भी इशारा करता है। पुलिस की जांच से आने वाले समय में पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है।
