ऊर्जा विभाग के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश की उत्पादन क्षमता जहां 11,803 मेगावॉट थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 22,000 मेगावॉट तक पहुंच चुकी है। अब इसे और आगे बढ़ाने के लिए थर्मल पावर के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने जालौन में 500 मेगावॉट का नया सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत राज्य में सौर ऊर्जा इंस्टॉलेशन तेजी से बढ़ रहे हैं और अब तक करीब 4 लाख से अधिक सोलर कनेक्शन के जरिए लगभग 1400 मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन किया जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री के मुताबिक यूपी बायो एनर्जी के क्षेत्र में भी देश में अग्रणी बन चुका है। अयोध्या को देश की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा चुका है और आने वाले समय में 11,000 मेगावॉट से अधिक सौर परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2034 तक प्रदेश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 55,840 मेगावॉट तक पहुंचाया जाए।
इसी बीच बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में लाखों नए पोल लगाए गए हैं, हजारों किलोमीटर पुराने तार बदले गए हैं और सैकड़ों नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इससे बिजली वितरण व्यवस्था पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है और पीक डिमांड के दौरान आपूर्ति में सुधार देखने को मिला है।
हालांकि इसी बीच ऊर्जा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब बिजली विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच स्टेट विजिलेंस को सौंपी जाएगी, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और प्रभावी हो सके।
कुल मिलाकर यूपी सरकार का यह ऊर्जा रोडमैप राज्य को न केवल बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि इसे देश के सबसे मजबूत पावर हब के रूप में स्थापित करने की ओर भी इशारा करता है।
