नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के झांसी में ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने पुलिस और स्थानीय लोगों को भी चौंका दिया है। इस मामले में पुलिस ने दो युवतियों यशस्वी द्विवेदी और निशा खान को गिरफ्तार किया है, जबकि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा कॉन्स्टेबल रजत सिंह फिलहाल फरार है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से ऑनलाइन सट्टा और अवैध वित्तीय लेन-देन का काम कर रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 सोने के बिस्कुट, करीब 1.5 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, 20 लाख रुपये नकद, 12 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। माना जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है।
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा यशस्वी द्विवेदी को लेकर हो रही है, जो एमए और बीएड पास है और टीचर बनने का सपना देखती थी। लेकिन उसकी मां सुमन ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि कॉन्स्टेबल रजत सिंह ने पहले उसे अपने प्रेमजाल में फंसाया और फिर धीरे-धीरे अपने अवैध कारोबार में शामिल कर लिया।
परिजनों के मुताबिक, रजत सिंह करीब 9 साल पहले यशस्वी के घर आता-जाता था, जब वह पुलिस चौकी में तैनात था। उस समय यशस्वी पढ़ाई कर रही थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और रिश्ता बन गया। जब परिवार को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने यशस्वी की शादी और सगाई की कोशिश की, लेकिन हर बार वह रिश्ते से पीछे हट गई।
आरोप है कि रजत सिंह ने अपनी शादीशुदा स्थिति छिपाकर यशस्वी को झांसी की पॉश रॉयल सिटी कॉलोनी में अपने साथ लिव-इन में रखा और बाद में उसे ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क में शामिल कर लिया। इसी दौरान वह इस अवैध कारोबार का हिस्सा बन गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यशस्वी ने हाल ही में दरोगा भर्ती परीक्षा भी दी थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी, लेकिन इसी बीच वह इस गैंग के संपर्क में आ गई।
फिलहाल पुलिस फरार कॉन्स्टेबल रजत सिंह और उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है। साथ ही बरामद संपत्ति और बैंक खातों की गहन जांच जारी है ताकि पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके। पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित आर्थिक अपराध का बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है।
