नई दिल्ली। झांसी के मऊरानीपुर में बुंदेलखंड केसरी महाराज छत्रसाल की 377वीं जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सवर्ण समाज के युवाओं ने एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की गूंज सुनाई दी।
कार्यक्रम की शुरुआत महाराज छत्रसाल के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद देशभक्ति गीतों ने माहौल को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया। उपस्थित युवाओं ने उनके साहस, त्याग और बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।कार्यक्रम के संयोजक कार्तिक शर्मा ढिमलौनी ने कहा कि महाराज छत्रसाल केवल एक शासक नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और धर्म रक्षा के प्रतीक थे। उन्होंने मुगल सत्ता को चुनौती देकर बुंदेलखंड में स्वतंत्र हिंदू राज्य की स्थापना की और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की मिसाल पेश की।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी उनका धैर्य और रणनीतिक कौशल अद्भुत था। उन्होंने अपने पराक्रम और नेतृत्व क्षमता से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने एक स्वर में कहा कि आज के समय में महाराज छत्रसाल के आदर्श और भी प्रासंगिक हैं। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सकता है।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने राष्ट्र सेवा और समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। इस आयोजन में नरेंद्र सिंह तोमर, रोहित त्रिपाठी, ओम द्विवेदी, शशांक शर्मा, अंशुल तोमर सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।
