ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग विलेन की तरह काम कर रहा था और भाजपा के साथ मिलकर करीब 100 सीटें “लूटी गईं।” ममता ने दावा किया कि काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा किया गया, कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के साथ बदसलूकी हुई और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया गया।
उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया, छापेमारी की गई और कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया। ममता ने आरोप लगाया कि पूरे चुनाव में सत्ता पक्ष ने दबाव और डर का माहौल बनाया। उनका कहना था कि “आधिकारिक तौर पर वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने ही चुनाव जीता है।”
ममता ने अपने राजनीतिक तेवर भी साफ कर दिए। उन्होंने कहा,अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ूंगी, सड़कों पर रहूंगी और शेर की तरह लड़ाई जारी रखूंगी। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 5 सांसदों समेत 10 सदस्यों की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 294 में से 207 सीटें हासिल की हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे के साथ ही 15 साल से सत्ता में काबिज ममता सरकार का अंत हो गया।
इन चुनावों में सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK ने चौंकाने वाली जीत दर्ज की, जबकि केरल में कांग्रेस की वापसी हुई और असम-पुडुचेरी में NDA ने सत्ता बरकरार रखी। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के तीखे तेवर और चुनाव नतीजों पर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और गर्माने वाले हैं।
