दरअसल, पिछले कुछ समय में AI टूल्स की मदद से बनाए गए गानों की बाढ़ सी आ गई है… ये गाने इतने एडवांस और रियल लगते हैं कि आम श्रोता उनके असली या नकली होने में फर्क नहीं कर पाते… ऐसे में यह नया फीचर म्यूजिक इंडस्ट्री में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है…
स्पॉटिफाई के इस नए सिस्टम के तहत उन कलाकारों को ‘वेरिफाइड बैज’ दिया जाएगा, जो ऑथेंटिसिटी चेक पास करेंगे… यानी कलाकारों को यह साबित करना होगा कि वे वास्तविक हैं और उनका म्यूजिक खुद का बनाया हुआ है… इसके लिए आर्टिस्ट्स को अपने लाइव कॉन्सर्ट, सोशल मीडिया प्रोफाइल, मर्चेंडाइज और फैन एंगेजमेंट जैसे सबूत देने होंगे…
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा श्रोताओं को होगा… अब यूजर्स यह आसानी से पहचान सकेंगे कि वे किसी इंसानी कलाकार का ओरिजिनल गाना सुन रहे हैं या फिर AI द्वारा जनरेट किया गया ट्रैक… इससे न सिर्फ यूजर्स का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि असली कलाकारों को भी उनका हक मिलेगा, जो AI म्यूजिक की वजह से प्रभावित हो रहे थे…
म्यूजिक इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI तकनीक जहां क्रिएटिविटी को नई दिशा दे रही है, वहीं यह कई नई चुनौतियां भी पैदा कर रही है… खासतौर पर कॉपीराइट, ऑथेंटिसिटी और आर्टिस्ट की पहचान जैसे मुद्दे तेजी से उभर रहे हैं… ऐसे में Spotify का यह कदम इन समस्याओं से निपटने की एक शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है…
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले कुछ हफ्तों में यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और धीरे-धीरे लाखों आर्टिस्ट्स को इसमें शामिल किया जाएगा… चूंकि प्लेटफॉर्म पर कलाकारों की संख्या बहुत ज्यादा है, इसलिए यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया होगी…
कुल मिलाकर, AI म्यूजिक के बढ़ते दौर में Spotify का यह कदम गेम-चेंजर साबित हो सकता है… यह न सिर्फ असली और नकली के बीच की लाइन को साफ करेगा, बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री में भरोसा और पारदर्शिता भी बढ़ाएगा… अब देखना होगा कि दूसरे प्लेटफॉर्म्स भी इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं…
