रात करीब 11 बजे शुरू हुआ यह संबोधन देर रात 1 बजे तक चला जिसमें दामोदर यादव ने अपने खास अंदाज में विरोधियों पर जमकर निशाना साधा उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत स्थानीय बुंदेली और मालवी लहजे से करते हुए लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया और फिर सामाजिक न्याय तथा सत्ता में भागीदारी के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया
यादव ने कहा कि जो लोग आज उनकी विचारधारा और यात्रा को रोकने की कोशिश कर रहे हैं वे दरअसल समाज में आ रही जागरूकता से डरे हुए हैं उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट तक चिट्ठियां भेजी जा रही हैं ताकि उनके आंदोलन को रोका जा सके लेकिन अब यह रुकने वाला नहीं है
अपने भाषण में उन्होंने सबसे बड़ा संदेश दलित और पिछड़ा वर्ग की एकता को लेकर दिया उन्होंने कहा कि जिस दिन यह दोनों वर्ग एकजुट हो जाएंगे उस दिन देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल जाएंगी उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के लिए जागरूक हों और अपनी ताकत को पहचानें
घोड़ी पर चढ़ने को लेकर समाज में होने वाले विवादों पर भी यादव ने तीखा कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सदियों तक कुछ वर्गों को दबाकर रखा अब वही लोग डर रहे हैं उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और अब जो भेदभाव करेंगे उन्हें जवाब मिलेगा उनका यह बयान सभा में मौजूद लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बना रहा
दामोदर यादव ने बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के संघर्ष और उनके योगदान को याद करते हुए लोगों से अपने वोट की ताकत को समझने की अपील की उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति वोट है और अगर सही तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए तो सत्ता की तस्वीर बदली जा सकती है
इस कार्यक्रम में भीम युवा संगठन और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए आसपास के गांवों से भी लोग देर रात तक कार्यक्रम में डटे रहे और पूरा माहौल जय भीम के नारों से गूंजता रहा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीहोर जिले में आजाद समाज पार्टी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और इस तरह की आक्रामक सभाएं आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं दामोदर यादव के इस भाषण को भी उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है
