“सशक्त नारी से ही सशक्त राष्ट्र का होगा निर्माण”—सुनील कुमार सेन
झांसी। मिशन शक्ति फेज़-5 के अंतर्गत बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान द्वारा आयोजित नारी शक्ति कला प्रदर्शनी “वसुंधरा” का भव्य उद्घाटन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप कुलसचिव (वित्त) सुनील कुमार सेन ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ऋतु शर्मा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में गोविंद यादव तथा डॉ. अंकिता शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य कला के माध्यम से नारी सशक्तिकरण के विविध आयामों को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति से दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में उप कुलसचिव सुनील कुमार सेन ने कहा कि “नारी शक्ति समाज की मूल आधारशिला है। वर्तमान समय में महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रही हैं। ‘वसुंधरा’ जैसी कला प्रदर्शनी न केवल उनकी सृजनात्मकता को अभिव्यक्ति प्रदान करती है, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और जागरूकता के मूल्यों को भी सुदृढ़ करती है। मिशन शक्ति के अंतर्गत ऐसे आयोजन सामाजिक चेतना को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

मुख्य अतिथि डॉ. ऋतु शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “नारी केवल सृजन की प्रतीक नहीं, बल्कि समाज की संरचना की केंद्रीय शक्ति है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से नारी के विविध रूपों—संघर्ष, संवेदना, धैर्य और आत्मनिर्भरता—को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया गया है, जो अत्यंत सराहनीय है।”

विशिष्ट अतिथि गोविंद यादव ने कहा कि “नारी सम्मान और सशक्तिकरण को व्यवहार में उतारना समय की आवश्यकता है। यह प्रदर्शनी उसी दिशा में एक सार्थक और प्रेरक प्रयास है।” वहीं डॉ. अंकिता शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि “कला समाज का दर्पण होती है, और इस प्रदर्शनी में प्रस्तुत कृतियां नारी जीवन के विविध आयामों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ चित्रित करती हैं।”
कार्यक्रम की रूपरेखा संयोजक एवं मिशन शक्ति फेज़-5 की नोडल अधिकारी तथा ललित कला संस्थान की समन्वयक डॉ. श्वेता पांडेय ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि “वसुंधरा” शीर्षक नारी के धैर्य, सहनशीलता और सृजनशीलता का प्रतीक है। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए उन्हें रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करना है।
कला आचार्य गजेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि “कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में चेतना जागृत करने का प्रभावी साधन है। विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से नारी शक्ति के विविध स्वरूपों को अत्यंत सजीव और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है।
प्रदर्शनी में चित्रकला, पोस्टर, स्लोगन, रंगोली, छायांकन एवं मूर्तिकला सहित विभिन्न विधाओं में 100 से अधिक कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया। इन कृतियों में नारी के विविध रूप—ममता, शक्ति, त्याग, संघर्ष, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक जागरूकता—को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया गया। अनेक कृतियों में महिला शिक्षा, आत्मनिर्भरता, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया, जिसने दर्शकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया।
इस प्रदर्शनी में अलादीन, आदेश, शिवानी कुशवाह, निशा अहिरवार, निशा वर्मा, सत्यम, दीपिका राजपूत, फैसल उस्मानी, आदर्श, ब्रजेंद्र, प्रिया यादव, स्वेक्षा, शुभ, महाश्वेता, अनुज, सबत ख़ाल्दी, श्रीआ पांडेय सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता प्रदान की। प्रतिभागियों की रचनात्मकता और सामाजिक विषयों के प्रति उनकी संवेदनशीलता प्रदर्शनी में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “इस आयोजन की सफलता सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं आयोजकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। ऐसी प्रदर्शनी न केवल कला को प्रोत्साहित करती हैं, बल्कि समाज में नारी सम्मान और सकारात्मक सोच को भी सुदृढ़ करती हैं।”
दर्शकों एवं उपस्थित जनसमूह ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे अत्यंत प्रेरणादायक और प्रभावशाली बताया। “वसुंधरा” नारी शक्ति कला प्रदर्शनी ने कला और सामाजिक चेतना के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया तथा यह सिद्ध किया कि कला समाज में जागरूकता और परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम है।
