🌺 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌺
सखी…
आधुनिक दुनिया की चकाचौंध में
दौड़ती-दौड़ती
न निकल जाना तुम
स्त्रीत्व से भी आगे।
न बन जाना तुम पुरुष,
बचाकर रखना अपने भीतर
स्त्रीत्व के उस अंश को,
जो तुम्हें प्रकृति ने
उपहार स्वरूप भेंट किया है।
आज़ादी के नाम पर यह मत भूलना,
कि प्रकृति ने भी
स्त्री को ही माँ बनने का हक दिया है।
कुछ तो नियति रही होगी, प्रकृति की,
जो उसने पुरुष को नहीं दिया यह गुण।
तो प्रकृति ने जिस गुण से
तुम्हें नवाज़ा है,
इस स्त्रीत्व को बचाए रखना
अपने भीतर—
जिम्मेदारी बनती है तुम्हारी।
सदियों से दबाई हुई स्त्री
आज सारे उन बंधनों को
तोड़ देना चाहती है,
जो पुरुषों ने
अपने आप को प्रधान बनाए रखने के लिए
स्त्रियों पर लगाए थे।
ठीक भी है—
तुम क्यों बंधी रहो
ऐसे नियमों में,
जो तुम्हें
तुम्हारे ही अस्तित्व की पहचान
भूलने पर मजबूर कर दें।
लेकिन…
इन गुलामी की जंजीरों को
तोड़ते-तोड़ते
तुम अपने भीतर छुपी हुई
ममता, करुणा, धैर्य,
सहनशीलता, त्याग, समर्पण,
सहानुभूति, समझदारी,
शक्ति और साहस को
भी न तोड़ देना।
क्योंकि यह सब
तुम्हारी कमजोरी नहीं,
बल्कि वह ताकत है
जिसकी जरूरत
इस प्रकृति को,
इस समाज को,
इस घर-परिवार को है।
✍️ लेखिका – रचना तिवारी (अध्यापिका)
झांसी, उत्तर प्रदेश
