सांसद अनुराग शर्मा की जमीन पर बीमा निकलने के बाद प्रकाश में आया था मामला
झांसी। झांसी में जमीन के फर्जी प्रपत्र तैयार कर फसल का बीमा दिलाने वाले तीन अभियुक्तों को गरौठा और थाना प्रेमनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके कब्जे से कंप्यूटर, सीपीयू ओर फर्जी दस्तावेज भी बरामद कर लिए हैं। जबकि इस पूरे मामले में करोड़ों का फर्जीबाड़ा करने वाला मास्टरमाइंड इफको टोकियो बीमा कंपनी का जिले का अधिकारी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।

गुरुवार को पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रशिक्षु आईपीएस अरीमा नोमान ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दिनों थाना प्रेमनगर और गरौठा थाना में सहायक कृषि निदेशक ने मुकदमा दर्ज कराया था कि किसान फसल बीमा हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर बीमा की धनराशि हड़पी जा रही है। इस संबंध में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी थी। इधर इस मामले को एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने गंभीरता से लेकर प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे।
प्रकरण की विवेचना के दौरान इफको टोक्यो इंश्योरेंस कंपनी का कर्मचारी पारस नायक जिसने जिला जालौन उरई के धरगुंवा निवासी भूपेंद्र राजपूत की मुलाकात इफको टोक्यो इंश्योरेंस कंपनी के जिला कॉर्डिनेटर मुकेश सिंह से कराई थी। यह तीनों मिलकर फर्जी तरीके से किसान बीमा फसल हड़पने के लिए दस्तावेज तैयार करते थे। और किसानों का पैसा हड़पते थे। जिसमें गरौठा पुलिस ने भूपेंद्र राजपूत और पारस नायक निवासी जिला जालौन डकोर को गिरफ्तार कर सीपीयू, कंप्यूटर, माउस, मॉनिटर बरामद कर लिए। वही प्रेमनगर पुलिस ने जिला जालौन के ऋतिक तिवारी उर्फ रानू को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक यह तीनों किसानों के नाम पर फर्जी खतौनी तैयार कर नष्ट हुई फसल के बीमा की धनराशि हड़पते थे और आपस में बांट लेते थे। इस मामले का मास्टरमाइंड कंपनी का जिला कॉर्डिनेटर मुकेश कुमार सिंह अभी फरार चल रहा है। प्रशिक्षु आईपीएस ने बताया कि उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
सांसद की जमीन पर बीमा निकलने के बाद प्रकाश में आया था मामला
यह मामला उस समय प्रकाश में आया था जब झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग शर्मा की जमीन की फर्जी खतौनी तैयार कर किसान फसल बीमा की धनराशि हड़पी थी। इसके बाद मामला प्रकाश में आने के बाद एग्रीकल्चर डिप्टी डायरेक्टर ने जांच की थी। जिसमें यह साबित हुआ था कि बीमा कंपनी के कर्मचारियों की मिली भगत से फर्जी दस्तावेजों पर फर्जी कूट रचित तरीके से बीमा की धनराशि हड़पी जा रही है।
मास्टरमाइंड के कंपनी में और कितने सहयोगी
मास्टरमाइंड भले पुलिस की पकड़ से दूर हो लेकिन उसके कुछ सहयोगी आज भी कंपनी में बैठे हुए हैं और उसे पल-पल की खबर भेजने का काम करते हैं। यह सब ऐसे ही नहीं होता क्योंकि मास्टरमाइंड ने उन्हें भी फर्श से अर्स पर बैठाया है। यह जांच का विषय है। जब पुलिस यहां उसे पकड़ने और उस तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी। तब वह बिहार से सब पर नजर रखे हुए था। ऐसा सूत्र बताते हैं।
बलिया में पकड़ी नगदी का झांसी से क्या संबंध
सूत्रों की मानें तो बिहार चुनाव के ठीक पहले जुलाई माह में बलिया में एक व्यक्ति से एक करोड़ 80 लख रुपए बरामद हुए थे और उसने स्पष्ट भी किया था कि यह रुपया वह झांसी से लेकर आ रहा है जो बिहार में दिया जाना था। यही नहीं पुलिस गिरफ्त में आने वाला व्यक्ति भी मास्टरमाइंड मुकेश सिंह का ही रिश्तेदार बताया जा रहा है। आखिर एक करोड़ 80 लख रुपए की खेप झांसी से विहार की तरफ क्या इशारा कर रही है।
