गढ़मऊ झील की सफाई कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, ग्रामीणों को वर्षा जल संरक्षण के लिए किया जागरूक
झाँसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वितीय एवं पंचम द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के तीसरे दिन का कार्यक्रम जल संरक्षण एवं स्वच्छ पेयजल जागरूकता विषय को समर्पित रहा। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने श्रमदान, जन जागरूकता और बौद्धिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को जल के महत्व का संदेश दिया।

कार्यक्रम का प्रथम सत्र ग्राम कोछा भावर के समीप स्थित गढ़मऊ झील की सफाई के साथ आरंभ हुआ। इस दौरान स्वयंसेवकों ने उत्साह और जिम्मेदारी के साथ श्रमदान करते हुए झील के आसपास फैले प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य बेकार वस्तुओं को एकत्रित कर साफ किया। स्वयंसेवकों ने यह संदेश दिया कि जल स्रोतों की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। झील की सफाई के माध्यम से स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को यह भी बताया कि यदि जल स्रोत स्वच्छ रहेंगे तो ही स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में स्वयंसेवकों ने ग्राम गढ़मऊ में जनसंपर्क अभियान चलाया। इस दौरान घर-घर जाकर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के महत्व तथा वर्षा जल संरक्षण के उपायों के बारे में जानकारी दी गई। स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को बताया कि वर्षा जल का सही तरीके से संरक्षण किया जाए तो भूजल स्तर को बढ़ाया जा सकता है और भविष्य में जल संकट से बचा जा सकता है। उन्होंने लोगों को छतों से वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की सफाई तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित किया। ग्रामीणों ने भी इस अभियान में रुचि दिखाते हुए स्वयंसेवकों से संवाद किया और जल संरक्षण के विषय में अपने विचार साझा किए।इस दौरान कुछ स्वयंसेवकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। स्वयंसेवक आर्यन सिंह ने कहा कि “झील की सफाई करते समय हमें यह महसूस हुआ कि यदि हम सभी अपने आसपास के जल स्रोतों की जिम्मेदारी लें, तो पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखा जा सकता है।”

स्वयंसेविका सूरज ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि “ग्रामीणों से संवाद करते हुए यह समझ में आया कि जागरूकता के माध्यम से ही जल संरक्षण जैसे विषयों पर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।” वहीं स्वयंसेवक आदर्श ने कहा कि “राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से हमें समाज के साथ जुड़कर काम करने का अवसर मिलता है, जिससे हम न केवल समाज के लिए कार्य करते हैं बल्कि स्वयं भी बहुत कुछ सीखते हैं।”

इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्वेता पांडेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि जल मानव जीवन का आधार है और इसका संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य केवल सामाजिक सेवा करना ही नहीं, बल्कि युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का विकास करना भी है।

उन्होंने स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं से परिचित कराते हैं और उन्हें समाधान का भागीदार बनने के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर दीपिका ,आदर्श, ब्रजेंद्र, दिव्या, साक्षी, सचिन , ध्रुव, अमित,सूरज,काजल , स्वेच्छा, प्रिया,गौरी, मुस्कान, आर्यन इत्यादि ने अपनी सक्रिय सहभागिता प्रदान की।
