महिला दिवस की शुरुआत
1975 में हुई थी जब संयुक्त राष्ट्र (United Nation) ने ‘इंटरनेशनल विमेंस ईयर’ मनाते हुए पहली बार इंटरनेशनल विमेंस डे का आयोजन किया था।
इसके दो साल बाद यानी साल 1977 में संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली ने 8 मार्च को ‘महिला अधिकार दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की। हालांकि, महिला दिवस का इतिहास इससे कहीं पहले का है. 28 फरवरी, 1909 को अमेरिका के सोशलिस्ट पार्टी ने इसे पहली बार मनाया था ।इसके बाद महिला दिवस को लेकर संघर्ष और आंदोलनों की एक लंबी प्रक्रिया चली, जिसमें महिलाओं ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाई।
विमेंस डे की थीम
हर साल महिला दिवस के साथ एक विशेष थीम जुड़ी होती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की दिशा और उद्देश्य को उजागर करने के लिए चुना जाता है. 1996 से यह परंपरा शुरू हुई थी।
*2025 की थीम ‘Accelerate Action’ थी*।
*इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम “अधिकार और न्याय के साथ-साथ हर महिला और बालिका के सशक्तिकरण के लिए वास्तविक कार्रवाई” पर केंद्रित है*।
इस थीम का उद्देश्य महिलाओं के समान अधिकारों और अवसरों को बढ़ावा देने में तेजी लाना है. इसका मकसद महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और असमानता को समाप्त करना है, ताकि समाज में हर किसी को समान अवसर मिल सके।
महिला दिवस का महत्व
महिला दिवस का उद्देश्य महिलाओं के संघर्ष, उनके अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका के प्रति अवेयरनेस बढ़ाना है. यह दिन समाज को यह याद दिलाने का अवसर है कि महिलाओं को अब भी पुरुषों के निर्णयों पर निर्भर रहना पड़ता है, चाहे वह घर हो या वर्किंग प्लेस. इस दिन के जरिए महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अधिकार और अवसर मिलने की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा दी जाती है.।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) नारी शक्ति, उनके अदम्य साहस, संघर्ष और समाज में उनके अतुलनीय योगदान को सलाम करने का दिन है। यह दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को याद दिलाने का अवसर है, जो शिक्षा, विज्ञान से लेकर हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
ये दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है। इस दिन को महिलाओं की आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक तमाम उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। साथ ही उन्हें यह ऐहसास कराया जाता है कि वह हमारे लिए कितनी खास हैं। आज एक महिला केवल एक बेटी, मां या पत्नी नहीं होती, वह समाज की रीढ़ की हड्डी होती है। आज की महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर खेल के मैदान तक और घर की चौखट से लेकर व्यापार की दुनिया तक, हर जगह अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं।
*एक महिला के विचार मेरे शब्दों में*
💁🏻♀️मेरा मकान “मेरा घर” है, होटल का कमरा…नहीं है।
जूठी प्लेट्स और बर्तन ये बताते हैं, कि… मैंने अपने परिवार को भोजन खुद बना कर कराया है…।
जमीन पर इधर – उधर फैली चीजें बताती है, कि…मेरे घर में बच्चे हैं… जो अपनी मर्जी से खेल खिलौने खेल सकते हैं… अरे मेरे बच्चे मेरे अपने घर नहीं खेलेंगे, तो क्या… पड़ोसी के घर खेलेंगे…।
एक गठरी धुलने के कपड़ों वाली ये बताती है, कि… मैं अपने परिवार को हमेशा साफ कपड़ों में रखती हूं।
एक गीला बाथरूम ये बताता है, कि अभी अभी मेरे बच्चे नहा के निकले हैं…।
तो आगे से जब भी आप मेरे घर में आएं तो मेरे घर के प्रति अपने मन में यह अस्त व्यस्त वाली धारणा बनाने से पहले कृपया दो बार सोच लें।
अगर आप मेरे से मेरे परिवार से मिलने आए हैं… तो आपका दिल से स्वागत है..!
और यदि मेरे घर को देखने और मुझे मेरे क्रिया कलाप से जज करने आए हैं, तो… आने से पहले कृपया एक appointment जरूर ले कर आएं।
एक बात, आप सब के लिए
मै भी एक इंसान हूं कोई मशीन नही …
जो… परिवार के हर सदस्य के पीछे भागती रहे और हर पल, हर मिनट… चीजों को व्यवस्थित करती जाए… थोड़ा थोड़ा सबको हाथ बटाना चाहिए, घर समेटने में…ये जिम्मेदारी किसी एक की नही होनी चाहिए।
मैं एक पत्नी हूं…!
मैं एक मां हूं…!
मैं एक दोस्त हूं…!
एक ऑफिस वर्कर हूं…!
मैं एक बेटी और एक बहन भी हूं…!
“घर को सुव्यवस्थित रखने के अलावा मेरी अन्य भी कार्य प्रणाली है।”*
आखरी और महत्वपूर्ण, बात… ✍️
मेरा अपना भी एक मूड है ”
सभी महिलाओं को समर्पित
लेखक:- रूपनारायण चतुर्वेदी
रिटायर्ड रेलवे अधिकारी
भोपाल मध्यप्रदेश
