फर्जी दानपत्र से जमीन हड़पने का आरोप, भू-माफियाओं की करतूत पर टहरौली में मचा बबाल
लगभग 5 लाख की स्टांप ड्यूटी जमा होते ही खुला फर्जीवाड़े का राज, भू-माफियाओं, जिम्मेदारों की मिलीभगत से जमीन हड़पने का आरोप
झांसी/टहरौली। झाँसी के टहरौली क्षेत्र में जमीन हड़पने के कथित बड़े खेल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले एक “दानवीर” अंत्योदय राशन कार्ड धारक द्वारा करीब एक करोड़ रुपये की जमीन दान करने और लगभग पांच लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा होने का मामला उजागर होते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पीड़ितों ने इसे भू-माफियाओं की सुनियोजित साजिश बताते हुए उपजिलाधिकारी से मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम खिरिया निवासी धर्मेन्द्र कुमार एवं अन्य लोगों ने उपजिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि मौजा टहरौली किला की भूमि संख्या 263 मूल रूप से रामप्रसाद पुत्र लटोरे के नाम दर्ज थी। रामप्रसाद ने 4 सितंबर 2012 को उपनिबंधक कार्यालय टहरौली में पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से 37.2 वर्गमीटर व 1934.88 वर्गमीटर भूमि धर्मेन्द्र कुमार और मुकेश कुमार गुप्ता के नाम बैनामा कर दी थी। इसके अलावा भी लगभग 15-16 अन्य लोगों के पक्ष में अलग-अलग विक्रय विलेख किए गए और खरीदार वर्षों से जमीन पर कब्जा कर मकान व दुकान बनाकर रह रहे हैं।
पीड़ितों के अनुसार प्रशासनिक कारणों से समय पर दाखिल-खारिज नहीं हो सका। इसी बीच रामप्रसाद की मृत्यु के बाद राजस्व अभिलेखों में उनके पुत्र बाबूलाल और मनोहर के नाम दर्ज हो गए, जिसका कथित रूप से फायदा उठाते हुए पूरे फर्जीवाड़े की पटकथा लिखी गई।
आरोप है कि 1 फरवरी 2026 को बाबूलाल ने पंजाब नेशनल बैंक शाखा टहरौली से भूमि संख्या 263/1 को अपनी बताकर किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 50 हजार रुपये का ऋण भी ले लिया। वहीं 17 फरवरी 2026 को मनोहर ने उपनिबंधक कार्यालय टहरौली में भूमि संख्या 263/2 को खाली दर्शाते हुए जगत विभिन्न जगहों के पाँच व्यक्तियों के पक्ष में तीन अलग-अलग दानपत्र निष्पादित कर दिए।
इन दानपत्रों में करीब 96.90 लाख रुपये कीमत की भूमि दान दर्शाई गई और 4,84,600 रुपये की भारी-भरकम स्टांप ड्यूटी जमा की गई। पीड़ितों का कहना है कि अंत्योदय कार्ड धारक और मजदूरी करने वाला व्यक्ति आखिर एक करोड़ रुपये की जमीन कैसे दान कर सकता है, यह अपने आप में बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जैसे ही इस खेल की भनक लगी, उन्होंने तत्काल उपनिबंधक टहरौली को लिखित आपत्ति देकर पुराने पंजीकृत विक्रय विलेख प्रस्तुत किए और दानपत्र रोकने की गुहार लगाई। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आपत्ति के बावजूद पहले से बिक चुकी भूमि का कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर दानपत्र पंजीकृत कर दिया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित धर्मेन्द्र कुमार, मुकेश कुमार गुप्ता, देवेन्द्र कुमार, राजेन्द्र कुमार रावत समेत अन्य लोगों ने बाबूलाल, मनोहर और दानपत्र कराने वाले नामजद व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी टहरौली अक्षय दीपक ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण की जांच कराई जा रही है और यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
