ओरछा/झांसी। बुंदेली भाषा के राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन तीर्थ नगरी ओरछा स्थित होटल बुंदेलखंड रिवरसाइड के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के प्रमुख एवं राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बुंदेली भाषा ने सदैव भारत का मान बढ़ाया है और इसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
अखिल भारतीय बुंदेलखंड साहित्य एवं संस्कृति परिषद, भोपाल के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार पद्मश्री कैलाश मड़वैया ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बुंदेली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना आवश्यक है, जिससे इस भाषा को उचित सम्मान और संरक्षण मिल सके।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने बहुचर्चित काव्य ग्रंथ ‘ढ़ला चला’ और संस्था के बुंदेली वार्षिक कैलेंडर 2026 का लोकार्पण किया। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 31 जिलों के साहित्यकारों ने भाग लेकर रचनापाठ किया। कार्यक्रम में झांसी के प्रो. मुन्ना तिवारी, राठ के बालकिशन जोशी, छतरपुर के मनोज मनसिज, टीकमगढ़ के सत्यनारायण तिवारी, दतिया के डॉ. शिरोमणि सिंह ‘पथ’, सियाराम अहिरवार, शोभा शर्मा, संध्या मिश्रा और नीतू चौरसिया सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
सार्वजनिक प्रीतिभोज के बाद आयोजित अपराह्न सत्र में बुंदेली भाषा के निबंधों का पाठ किया गया। इस दौरान काव्य ग्रंथ ‘ढ़ला चला’ पर बांदा के वी.के. जोशी, मऊरानीपुर के कमलापति रावत, छतरपुर की मालती जैन, ग्वालियर और भोपाल से डॉ. कैलाश जैन तथा ओरछा के शिवकुमार सहित कई साहित्यकारों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के मंच पर साहित्यकार कैलाश मड़वैया और डॉ. कामिनी भी उपस्थित रहीं। रात्रि में आयोजित अखिल भारतीय बुंदेली कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता कैलाश मड़वैया ने की, जबकि संचालन डॉ. शिरोमणि सिंह ‘पथ’ ने किया। सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने बुंदेली भाषा की समृद्ध परंपरा को अपने काव्य पाठ के माध्यम से प्रस्तुत किया।
