– हिंदी पत्रकारों की दुर्दशा पर जताई चिंता, उठाई सम्मान की मांग
झांसी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हिंदी पत्रकार संघ मुंबई एवं महिला पार्टी से संयुक्त तत्वावधान में बुंदेलखंड की महिला पत्रकारों का अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें डॉ.स्मिता पांडेय, सोनिया पांडेय, सरिता सोनी, संगीता राजभर, अलका चौबे सहित अन्य महिला पत्रकारों का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.स्मिता पांडेय ने की। इस दौरान पत्रकार सोनिया पाण्डे ने कहा कि योगी जी के काल में महिला पत्रकार सुरक्षित हैं, वह रात में भी सुरक्षित अपने घर जा सकती हैं। लेकिन आर्थिक रूप से सुरक्षा पाने के लिए अभी बहुत काम करना बाकी । पत्रकार शीतल तिवारी ने पत्रकारों को मूलभूत सुविधाएं देने की बात कही। आयुष्मान कार्ड 70 वर्ष के ऊपर के लोगों को दिया गया है, वैसी सुविधा बिना आयु सीमा की शर्त के समस्त पत्रकारों को दी जानी चाहिए।
पत्रकार सरिता सोनी ने बालकों को भी संस्कार देने पर जोर दिया। इस दौरान 90 वर्षीय अध्यापक हन्नू शुक्ला ने बेटा-बेटी में भेद न करने को कहा। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार दीपचंद चौबे, मनीषा श्रीवास्तव, राधा कुकरेजा, सपना नगाइच, रानू राय, अनुष्का तिवारी, खुशी, लवी उपाध्याय, दीपक राय, अमित शर्मा ने महिला सम्मान व अधिकारों की बात कही।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष बनर्जी व शीतल तिवारी ने महिला पत्रकारों का अभिनंदन किया। सभा के अनुमोदन के पश्चात पत्रकार संघ के मांग पत्र को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव प्रमोद कुमार मिश्रा आईएएस के वॉट्सऐप पर कार्यवाही के अनुरोध सहित प्रेषित किया गया। कार्यक्रम के दौरान दर्जन भर से अधिक महिला पत्रकारों पर पुष्प वर्षा की गई। इस दौरान हिन्दी पत्रकार संघ को और सक्रिय बनाने का संकल्प लिया गया।
*रोटरी क्लब ऑफ झाँसी एलीट ने मनाया महिला सशक्तिकरण दिवस*
रोटरी क्लब ऑफ झांसी एलीट द्वारा लक्ष्मी व्यायाम मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क कृत्रिम अंग वितरण शिविर के दूसरे दिन महिला सशक्तिकरण दिवस भी उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जय एकैडमी ग्रुप की मैनेजिंग डायरेक्टर आरुषि गुप्त और विशिष्ट अतिथि मां फाउंडेशन की डायरेक्टर नेहा शर्मा रहीं।

शिविर में दूर-दराज से आए दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम हाथ-पैर और अन्य सहायक उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे वे अपने दैनिक जीवन के कार्य आसानी से कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने बताया कि शिविर के प्रथम दिन 100 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग वितरित किए गए जबकि 110 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं, जिन्हें शिविर के समापन दिवस 9 मार्च को कृत्रिम अंग मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे की उपस्थिति में वितरित किए जाएंगे।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जल सहेलियों का हुआ सम्मान, यमुना संरक्षण का लिया संकल्प
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वृंदावन गार्डन सिमरावरी में जल सहेलियों के सम्मान एवं यमुना संरक्षण के संकल्प का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद सभी जल सहेलियों ने एक-दूसरे को महिला दिवस और होली की रंग पंचमी की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन सुलेखा जी ने किया। इस अवसर पर यमुना अविरल–निर्मल पदयात्रा में शामिल सभी जल सहेलियों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस मौके पर जल सहेली समिति के संस्थापक डॉ. संजय सिंह ने जल सहेलियों को संबोधित करते हुए कहा कि यमुना अविरल–निर्मल पदयात्रा ने एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि त्याग और सत्य ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर जल सहेलियों ने 29 दिनों तक कठिन परिस्थितियों में यात्रा कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि शांति, जागरूकता और नदी संरक्षण का सशक्त संदेश है।
डॉ. संजय सिंह ने कहा कि समाज में कई तरह के सवाल उठते हैं, लेकिन सच्चे मन से किए गए कार्यों का सम्मान समय अवश्य करता है। उन्होंने जल सहेलियों के त्याग, समर्पण और संघर्ष को नमन करते हुए कहा कि यमुना मैया की कृपा से यह अभियान आगे भी समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करता रहेगा। कार्यक्रम के अंत में सभी जल सहेलियों ने यमुना नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।
झांसी से ग्वालियर तक नारी शक्ति के हाथ बुंदेलखंड एक्सप्रेस की कमान
लोको पायलट से गार्ड तक सब कुछ महिला रेलकर्मियों के हवाले
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन रविवार को नारी शक्ति के अदम्य साहस और कौशल का गवाह बना। इस खास दिन को यादगार बनाते हुए रेलवे प्रशासन ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस के संचालन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी। ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जिसके बाद झांसी से ग्वालियर तक का सफर पूरी तरह महिला क्रू के भरोसे रहा।

ट्रेन की कमान मुख्य लोको पायलट कौशल्या देवी ने संभाली, जिन्हें सहायक लोको पायलट दीप्ति का बखूबी साथ मिला। सुरक्षा और सिग्नल की जिम्मेदारी ट्रेन मैनेजर (गार्ड) अंजलि परमार ने निभाई। केवल इंजन ही नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और टिकट चेकिंग का मोर्चा भी वंदना मिश्रा, प्रगति यादव, भारती वर्मा और नाजिया निशा के मजबूत हाथों में रहा।

झांसी रेल मंडल की इस पहल ने यह संदेश दिया कि रेलवे के तकनीकी और चुनौतीपूर्ण कार्यों में महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं। स्टेशन पर यात्रियों ने भी तालियां बजाकर इस महिला टीम का उत्साहवर्धन किया। वीरांगना की धरती से शुरू हुआ यह सफर आधुनिक भारत की सशक्त होती महिलाओं की एक नई पहचान बनकर उभरा।
