जल व मिट्टी के संरक्षण पर हुआ दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

सूर्या मेटल इंडस्ट्रीज प्रा. लि. द्वारा कराए गए इस आयोजन में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के छात्रों की रही भागीदारी

झाँसी: जल और मृदा (मिट्टी) पंचतत्वों में से दो मुख्य तत्व हैं जो मानवीय जीवन में अहम भूमिका रखते हैं। वहीं दूसरी ओर बढ़ रही आधुनिकता और प्रदूषण के कारण दोनों ही तेज़ी से प्रभावित हो रहे हैं। यह बातें आपके दिमाग से ओझल हो सकतीं हैं लेकिन विज्ञान इन पर अपनी कड़ी दृष्टि बनाए रखती है। इसी के चलते नई शिक्षा नीति के तहत सूर्या मेटल इंडस्ट्रीज प्रा. लि. में प्रायोगिक कौशल को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें, जल व मिट्टी की गुणवत्ता के साथ-साथ इनके औद्योगिक व महत्व पर विश्लेषण किया गया। इस कार्यशाला में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी के रसायन विज्ञान (M.sc) के छात्रों ने भाग लेकर पूर्ण उत्साह के साथ प्रयोगात्मक कार्यशाला का अनुभव लिया।

यह प्रशिक्षण छात्रों को जल और मृदा परीक्षण के लिए विभिन्न विश्लेषणात्मक तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से किया गया। छात्रों को रासायनिक विश्लेषण, भौतिक-रासायनिक पैरामीटर और पर्यावरणीय विश्लेषण के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में सीखने का अवसर मिला। सूर्या मेटल इंडस्ट्रीज प्रा. लि. के संचालक एवं हाइड्रोलॉजिस्ट रूबल सिंह ने नेतृत्व करते हुए इन तकनीकों के बारे में छात्रों को विस्तृत जानकारी देकर प्रशिक्षित किया, और यह सुनिश्चित किया कि छात्रों को उनके आसपास के माहौल की जागरूकता हो, छात्रों को और भी अधिक सीखते रहने की आवश्यकता है। इस प्रशिक्षण के महत्व पर बात करते हुए, रूबल सिंह ने छात्रों को उनके आसपास की जागरूकता की जरूरत और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय योगदान देने की जरूरत को जताया।

इस अवसर पर संस्थान के डायरेक्टर राजीव मिश्रा एवं वैज्ञानिक सलाहकार डॉ० सुमित मिश्रा, इंस्टिट्यूट ऑफ़ जियोसाइंसेज़, मेक्सिको भी उपस्थित रहे।

सूर्या मेटल इंडस्ट्रीज प्रा. लि. की तरफ से इस प्रकार के कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने का महत्व बताया और कहा कि वे नियमित रूप से इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं जिससे झांसी में जागरूकता बढ़े और जनता को लाभ मिले। कंपनी पानी की शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है व जल और मृदा विश्लेषण में निरंतर कार्यरत है।

छात्रों को पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान के लिए तैयार करने के इस आयोजन में उनके शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा जिनमें समन्वयक डॉ० चित्रा गुप्ता, डॉ० आनंद कुमार द्विवेदी, डॉ० प्रकाश चंद्र, और डॉ० गौरी खानवालकर भी शामिल रहे।

Alok Pachori (A.T.A)

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