*नारी अस्तित्व*

मां, बहन, बेटी, या हो वह प्रेयसी,
जीवन के हर रूप में तुमने जैसे चाहा वह वैसी ढली।
पर चाह जब उसकी जगी,
उन्मुक्त हो वह रितुरोहित बनी।

 

और इन्हीं पंक्तियों को सार्थक करती हुई…..

आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं।
शहर हो या गांव सभी जगह महिलाएं एवं बेटियां अपने आप में बेहतर से बेहतर करने का प्रयास कर रही है। घर में खाना बनाने से लेकर वह आज चांद पर पहुंचने में भी पीछे नहीं है। यह सच है कि सदियों तक स्त्रियों को उनके हक से उनकी स्वतंत्रता से उन्हें वंचित रखा गया। पर आज के आधुनिक भारत में महिलाओं का जो स्वरूप निखार के सामने आया है वह काबिले तारीफ है।

महिलाओं के शिखर की ओर बढ़ते हुए कदमों में सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का है। इसीलिए आज बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार द्वारा भी महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। एवं महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून भी बनाए गए हैं।
परंतु महिलाओं को भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए ,कि वह अपनी गरिमा का अपनी स्वतंत्रता का गलत उपयोग न करें। यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है।

“2024 महिला दिवस की थीम है (इंस्पायर इंक्लूजन)।”
तो यह हम महिलाओं की भी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है, कि यदि हम अपने आसपास किसी जरूरतमंद या हुनरमंद महिलाओं को देखें और यदि आपकी मदद से वह अपने सपनों में रंग भर सके, तो हम उनका पूरा सहयोग करें ,उनके आगे आने में पूरा सहयोग प्रदान करें।
परंतु यह बात भी सत्य हैं, कि हमारे देश में आज भी बहुत सी महिलाएं पिछड़ी हुई है। उनका जीवन बहुत संघर्षमय है।

आज के समय में भी लड़कियों की शिक्षा आठवीं पास के बाद रोक दी जाती है और विवाह योग्य होने पर उनका विवाह कर दिया जाता है। आज भी महिलाएं मजदूरी और खेतों में काम करने के बाद भी पति से मार खा रही है। शादी के 10- 15 साल बाद भी पति को लगी पोर्न देखने की लत फिर अपनी पत्नी के साथ अमानवीय तरह के संबंध बनाने एवं मारपीट करने वाली घटनाएं जब मैं अपने ही आसपास सुनती हूं, तब मेरा अंतर्मन बेचैन हो उठता है। परंतु यह बात बिल्कुल सत्य है कि आज भी महिलाएं ऐसा जीवन की रही है। और इसका सबसे बड़ा कारण महिलाओं का अशिक्षित होना या अपने अधिकारों से वंचित रह जाना ही है। आज के समय में नारी सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें होने के बाद भी बहुत सी स्त्रियों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। नारी का अस्तित्व या उसकी पहचान तब तक नहीं हो सकती जब तक वह अपने हक के लिए स्वयं खड़ी ना हो। नारी का शिक्षित होना अति आवश्यक है।

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