इस बेबस और लाचार गाँव की यह चिट्ठी जरूर पढ़ना कमिश्नर साहब

महोबा : कमिश्नर साहब शायद आपको याद हो कि पंचायत चुनाव से पहले खम्हरिया जा रहे थे। उस समय बहुत उम्मीद थी कि हमारे यहां भी आना होगा पर ऐसा हुआ नहीं। पंचायत चुनाव के दौरान भी बहुत आशा थी कि शायद किसी बड़े अफसर की नजर कबरई ब्लॉक क्षेत्र की सीमा में आने वाला मैं यानी बरभौली पर पड़े, पर नहीं कोई नहीं आया। आखिर निराश, हताश हो एक बार फिर कमिश्नर साहब दिनेश कुमार सिंह आपसे गुहार है, हमारे गांव आ जाइए। यहां आकर हमारा दुख समझ जाएंगे। हां साहब एक बात और गांव के बाहर तक तो कार से आ सकते हैं, अंदर आबादी तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना होगा..।

दिनेश कुमार सिंह साहब यह पाती बहुत मजबूरी में. हताश-निराश होकर लिख रहा हूं। हमारी गोद में 3000 से अधिक लोगों का वास है। खेती किसानी कर गुजर बसर करने वाले मेरे बच्चों के मन में किसी से कोई गिला शिकवा नहीं पर यह कसक जरूर है कि वह जिम्मेदार जिन्हें एक छोटी से छोटी समस्या दिख जाती है उन्हें हमारी देहरी पर भरा नाला का पानी क्यों नहीं दिखता। पंचायत चुनाव के दौरान अफसर आए भी थे लेकिन दूसरे रास्ते आकर वाहन पर बैठे-बैठे ही देखते हुए निकल गए थे।

सुना है सरकार स्वच्छ भारत अभियान के लिए करोड़ों रुपये लगा रही है, पर हमारी यह दशा देख कर आपको लगता है कि उन करोड़ों रुपयों में एक पैसा यहां लगा है। कबरई विकासखंड क्षेत्र की सीमा में आने वाला मैं ग्राम बरभौली दो साल से उपेक्षा का दर्द झेल रहा हूं।

गंदा पानी मंझाते हुए आगे बढ़ेंगे तो श्याम बिहारी यादव के दरवाजे से लेकर मुख्य मार्ग तक 80 मीटर लंबे रास्ते तक जमीन नहीं केवल गंदा पानी दिखेगा। यह हाल अभी है तो सोचिए बारिश के दौरान क्या होगा। गांव की चौपालें सूनी हैं, गलियां वीरान हैं क्योंकि मेरी गोद में खेलने की चाहत रखने वाले मासूम गंदगी के डर से घरों में दुबके रहते हैं।
गांव के राहुल द्विवेदी भी इस समस्या के बारे में कई बार डीएम साहब को शिकायत पत्र दे चुके हैं। वैसे यह समस्या बढ़ी है जरूर लेकिन हल छोटा है। आबादी के बाहर एक नाला है। यदि यह पानी उधर मोड़ दिया जाए तो रास्ता एकदम साफ हो सकता है। पर हो नहीं रहा है।

अब तो हालात ऐसे हैं कि पानी भराव से कच्चे घर भी गिर सकते हैं। रघुराई यादव का मकान तो बिल्कुल घिरा है और कभी भी जमींदोज हो सकता है। हमारे सरपंच भी बेबस हैं। चाहे पहले वाले राजेंद्र वर्मा रहे हों या अब नए अजय कुशवाहा। इनकी भी किसी ने नहीं सुनी। तभी बेबस हो आप (मंडलायुक्त) को याद कर रहा हूं। हमारी समस्या पर गौर करिए. और समय लगे तो गांव आएगा जरूरत।

आपका अपना बेबस लाचार गांव बरभौली

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *