नई दिल्ली । भारत में होली के आठ दिन बाद, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इसे बसौड़ा भी कहा जाता है। यह पर्व माता शीतला की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें संक्रामक और त्वचा रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने वाले व्यक्तियों को चेचक, खसरा और अन्य त्वचा रोगों से सुरक्षा मिलती है।
कब है शीतला अष्टमी 2026
पंचांग के अनुसार इस वर्ष शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च 2026, बुधवार को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि 11 मार्च को प्रातः 01:54 बजे से शुरू होकर अगले दिन भोर 04:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत उसी दिन ही मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
माता शीतला की पूजा के लिए प्रातःकाल 06:36 बजे से सायंकाल 06:27 बजे तक का समय शुभ माना गया है। इसी अवधि में भक्त विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत का पालन करते हैं।
पर्व का महत्व
माता शीतला को रोगों से सुरक्षा देने वाली देवी माना जाता है। खासतौर पर चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता शीतला को ठंडी वस्तुओं का भोग अर्पित करने से वह प्रसन्न होती हैं और भक्तों को रोगों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
क्यों लगाया जाता है बासी भोजन का भोग
बसौड़ा के दिन घर में चूल्हा जलाने और ताजा भोजन बनाने की परंपरा नहीं होती। इसलिए एक दिन पहले बनाया गया भोजन माता शीतला को अर्पित किया जाता है। यह भोजन प्रसाद के रूप में बाद में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि माता शीतला को ठंडा या बासी भोजन प्रिय होता है। इससे शरीर में भी शीतलता बनी रहती है।
यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर-घर में बसौड़ा और बासी भोजन की परंपरा निभाई जाती है, जिससे परिवार के सदस्य भी गर्मियों की बीमारियों और संक्रामक रोगों से सुरक्षित रहते हैं।
