कौन हैं मेनका गुरुस्वामी
51 वर्षीय गुरुस्वामी एक संवैधानिक वकील हैं, जिन्होंने अपनी शिक्षा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों से प्राप्त की हैं। वह काफी समय से संविधान, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नागरिक अधिकारों का समर्थन करने वाली जानी-मानी आवाज रही हैं।
गुरुस्वामी और उनकी साथी अरुंधती काटजू उस अहम मुकदमे का हिस्सा थे, जिसने सुप्रीम कोर्ट को 2018 में 158 साल पुराना कानून रद्द करने को राजी किया। यह कानून सहमति से बने समलैंगिक रिश्तों को अपराध बताता था। इस कानून का रद्द होना एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लिए ऐतिहासिक जीत थी।
गुरुस्वामी ने कहा कि संविधान के ‘समानता, भाईचारा और भेदभाव रहित व्यवहार’ जैसे मूल्य उनके काम का आधार रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा में भी पश्चिम बंगाल के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
टीएमसी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने डीडब्ल्यू को बताया कि ‘गुरुस्वामी के चुने जाने के बाद राज्यसभा में पार्टी के कुल 13 में से पांच सदस्य अब महिलाएं हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि गुरुस्वामी का चुनाव टीएमसी की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति के अनुसार वह पढ़े-लिखे और संविधान को समझने वाली आवाजों को उच्च सदन में भेजना चाहते हैं, ताकी वे देश भर में विपक्ष की दलीलें स्पष्ट रूप से रख सकें।
TMC के सांसद
तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बाबुल सुप्रियो, अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी, पूर्व राज्य पुलिस प्रमुख राजीव कुमार और अभिनेत्री कोयल मलिक राज्यसभा के लिए चुने गए। खबर है कि चुने जाने के समय एडवोकेट गुरुस्वामी दिल्ली में थीं और इस वजह से विधानसभा नहीं पहुंच सकी थीं। तृणमूल नेता अरूप बिस्वास ने उनकी ओर से प्रमाण-पत्र हासिल किया था।
