मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान जो परिस्थितियां बनीं और जिस तरह का अमर्यादित व्यवहार सामने आया, वह बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर हों, तब उस राज्य की सरकार और मुख्यमंत्री का दायित्व होता है कि वे पूरे सम्मान और गरिमा के साथ उनका स्वागत करें तथा मर्यादा का पालन करें।
सीएम यादव ने कहा कि ऐसे हालात बनाना, जिससे देश और दुनिया के सामने राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचे, यह किसी भी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का पद पूरे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है और इस पद का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि और नागरिक का कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को हल्की राजनीति का हिस्सा बनाना और स्थानीय या दलीय राजनीति में घसीटना भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, यह मानसिकता लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद को राजनीतिक विवादों से दूर रखना चाहिए और सभी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह पद पूरे देश की गरिमा और प्रतिष्ठा का प्रतीक है।
डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर राष्ट्रपति पद का अपमान हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र अपनी मजबूत संस्थाओं और संवैधानिक पदों की गरिमा के कारण ही विश्व में सम्मानित है। ऐसे में राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद के प्रति सम्मान और मर्यादा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और उसके सम्मान से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
