पहूज नदी की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन ?

सफाई के लिए सीनियर सिटीजन समूह ने खोला मोर्चा
झांसी। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के महानगर झांसी स्थित पहूज नदी के नाम से कौन परिचित नहीं है? यही नदी जब मप्र के उन्नाव पहुंचती है तो इसमें स्नान करने पर चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। आजकल तो हर 6 माह में झांसी की गंगा मां पहूज की आरती उतारी जाती है। इस अवसर पर महानगर के जनप्रतिनिधियों समेत जिले व मंडल के अधिकारी भी वहां उपस्थित रहते हैं।

बड़ी-बड़ी फोटो समेत खबर भी प्रकाशित की जाती है। लेकिन आज पहूज नदी अतिक्रमण का शिकार है। दोनों किनारों पर हो रहे अतिक्रमण के चलते नदी नाले के रूप में सिकुड़ गई है। यही नहीं उसके घाट पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लोग उसे पिकनिक स्पॉट बनाए हुए हैं। अगरबत्ती के पैकेट से ज्यादा रसभरी के पैकेट पड़े हुए हैं। सफाई तो जैसे सालों से उस रास्ते से होकर नहीं गुजरी होगी। घाट पर लगा डस्टबिन व रैलिंग भी लोग तोड़कर चुरा ले गए हैं। कुल मिलाकर स्मार्ट सिटी की पूरी स्मार्टनेस पहूज नदी पर देखी जा सकती है।

 

गौरतलब है कि यह वही पहूज नदी है जिसे केंद्रीय मंत्री रही भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने 2014 में झांसी सांसद बनते ही गोद लिया था और मां गंगा की तर्ज पर इसको स्वच्छ करने का वीणा उठाया था। हालांकि यह अलग बात है कि उसके लिए बजट भी आया परंतु उसका हाल पहले से भी बुरा है। कई नाले उसमें मिलकर उसके पानी को जहरीला व दूषित करने में लगे हुए हैं। और कभी न खत्म होने वाली जलकुंभी आज भी अपना साम्राज्य फैलाए हुए है। इसकी सफाई का जिम्मा उठाते हुए अब सीनियर सिटीजन समूह ने मोर्चा खोलते हुए मांग उठाई है।

इस अवसर पर गणेश रेजीडेंसी के सीनियर सिटीजन समूह के अष्टप्रकाश त्रिपाठी,राजेश श्रीवास्तव, अशोक तिवारी, मनोज तिवारी, ओपी उपाध्याय,वीरेंद्र सविता,पीके अग्रवाल, जीपी मालवीय, एके जोशी,जितेंद्र मिश्रा, दीपक मजूमदार, जीके गोस्वामी आदि उपस्थित रहे।

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