काली पट्टी बांधकर शिक्षकों का विरोध जारी

शिक्षक विधायक ने बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की मांग पर मुख्यमंत्री को बताई शिक्षको की समस्या

झांसी। बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के ज्ञापन पर आज शिक्षक विधायक जी ने शिक्षको की समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा, प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन बहाली, 40 ई.एल., हॉफ सी.एल., राज्य कर्मचारी का दर्जा, स्वास्थ्य बीमा, सामूहिक बीमा प्रति विद्यालय एक प्रधानाध्यापक, एक लिपिक, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति, वेतन विसंगति दूर करना, गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति, अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण तथा निश्चित समय पर जनपद के स्थानान्तरण एवं समायोजन आदि प्रमुख हैं।


उधर जिलाध्यक्ष रसकेंद्र गौतम ने कहा कि बेसिक का शिक्षक डिजिटलाइजेशन एवं डिजिटल उपस्थिति का विरोधी नहीं हैं। परन्तु दोहरे मापदण्ड का विरोध करता हैं। ये प्रयोग सर्व प्रथम उन नौनिहालों पर किया जा रहा है जिन्हें और जिनके परिजनों को समय की सही समझ भी नहीं होती। यह प्रयोग उन शिक्षकों पर आजमाया जा रहा है जिन्हें अति पिछड़े क्षेत्रों में बिना संसाधन जाना और विद्यालय को व्यवस्थित करना होता है। आदेश में प्राकृतिक आपदा, भौतिक आपदा, दुर्घटना, तथा सामाजिक समस्याओं का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया है।

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में शिक्षक डिजिटल उपस्थिति को लेकर अपना विरोध जाहिर कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन काली पट्टी बांधकर किया जा रहा है। इसके जरिए सभी शिक्षक इस आदेश के खिलाफ अपना रोष शासन के सामने जता रहे हैं। बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में लाखों शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति का बॉयकॉट कर रहे हैं। क्योंकि विभाग के अधिकारीयों द्धारा संघ की मांगों पर कोई विचार नहीं किया जाता हैं और सारे समस्याओं को जड़ पुरे विभाग को लखनऊ से सेंट्रलाइजेशन किया जाने लगा ।प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष रसकेंद्र गौतम का कहना है अध्यापक काली पट्टी बांधकर शासन प्रशासन के समक्ष सांकेतिक रूप से गलत नीति का विरोध जता रहे हैं। क्योंकि डिजिटलाइजेशन एक अव्यवहारिक आदेश है, जिसको धरातलीय स्थिति के आकलन किए बगैर लागू किए जाने की होड़ है।

 

ग्रामीण अंचल में न तो बेहतर सड़क है न ही सुचारू विद्युत व्यवस्था। नेटवर्क भी खराब स्थिति में रहते हैं। ऐसे में हिटलरशाही फरमान जारी कर शिक्षकों का अपमान किया जा रहा है। बेहतर हो कि स्कूलों में मूलभूत कार्य पर ध्यान दिया जाए। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर शिक्षण में कारगर होगा, जिस पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। बरसात में अधिकांश स्कूल में बैठने लायक स्थिति तक नहीं है। न तो स्कूल का भौतिक परिवेश बेहतर किया जा रहा है। न ही शिक्षकों की मांगों पर कोई ध्यान दिया जा रहा है। पदोन्नति, पुरानी पेंशन अत्यधिक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर सरकार संवेदनहीनता दिखा रही है।

 

महामंत्री महेश साहू बताते हैं कि जनपद स्तर पर सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक साथी एकजुटता का परिचय देकर ऑनलाइन के नाम पर शोषणनीति का विरोध कर रहे हैं। इसके चलते डिजिटल उपस्थिति न लगाकर काला फीता बांधा जा रहा है। उन्होंने बताया कि 10 जुलाई सभी शिक्षक सयुक्त शिक्षक मोर्चा के बैनर तले शिक्षा भवन प्रांगण में बड़ी तादाद में सभी एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट के लिए कूच करेंगे। सूबे की सरकार के प्रति रोष जताते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे।

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