रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एक कच्चे तेल का टैंकर पहले ही 1 मार्च के आसपास होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है और सऊदी अरब का तेल लेकर शनिवार तक भारत पहुंच सकता है। इससे भारतीय ऊर्जा बाजार में आपूर्ति सुचारु रहने की उम्मीद है।
इससे पहले गुरुवार को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा था कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना रिश्ते और आपसी भरोसा रहा है इसलिए ईरान होर्मुज स्ट्रेट में भारत के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करेगा।
वहीं ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रिपोर्टें आई हैं। ब्रिटिश मीडिया सूरज की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सीना विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके एक पैर को काटना पड़ा और लिवर को गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल का एक हिस्सा पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात है।
मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की 28 फरवरी को मृत्यु के बाद 9 मार्च को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था। उनके घायल होने की खबरों ने ईरान की राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान के सुप्रीम लीडर की स्थिति गंभीर बनी रहती है तो फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं भारतीय टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिलने से घरेलू गैस आपूर्ति में अस्थायी राहत मिल सकती है।
