Corona वैक्सीनेशन: मेरा अपना अनुभव

कोरोना, लॉकडाउन, मौत और शमशान के बीच उम्मीद की किरण है वैक्सीनेशन। अनेक देशों को लॉकडाउन (Lockdown) और मास्क से मुक्ति, वैक्सीनेशन (Vaccination) के कारण मिल सकी है। मार्च 2020 में वैक्सीन बनी नहीं थी। तभी हमने तय कर रखा था कि हम वैक्सीनेशन तभी करायेंगे जब आपाधापी ख़त्म हो जायेगी। सभी ज़रूरतमंदों को वैक्सीन प्रथम वरीयता में मिल चुकेंगी। तब हम वैक्सीनेशन करायेंगे, फिर भले ही हमें उसे ख़रीदना क्यों न पड़े।

कोरोना (Corona) की वैक्सीन और दूसरी बीमारियों की वैक्सीन में अंतर यह है कि यह न सिर्फ़ स्वयं के लिए आवश्यक है दूसरों के स्वास्थ्य के लिए भी उत्तरदायी है क्योंकि यह छूत की बीमारी है। उसके प्रसार को रोकना आवश्यक है। 31 मई के लिए झाँसी से सटे हुए मध्य प्रदेश के निवाड़ी स्वास्थ्य केन्द्र पर वैक्सीन को कोविन-एप पर खुले हुए सारा दिन हो चुका था और 30 मई की शाम तक रजिस्ट्रेशन बंद होने में कुछ ही समय बचा था। वैक्सीन बाकी थी तो मैंने सपरिवार रजिस्ट्रेशन करा लिया।

वैक्सीनेशन सेंटर के इंचार्ज, नरेश ने बताया रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी सभी लोग नहीं आ रहे हैं। हम उन्हें फ़ोन करके बुला रहे हैं। बग़ैर रजिस्ट्रेशन के भी हम वैक्सीन लगा रहे हैं। तब भी कुछ न कुछ वैक्सीन बच जाती है।

सिस्टर- देवी नापित ने हमें हर बात के लिए आश्वस्त किया, जैसे कि वैक्सीन और सिरिंज निर्धारित पैकिंग से निकाली जा रही है। सिरिंज को प्रयोग के बाद तोड़ दिया गया आदि-आदि। सिस्टर ऊषा ने हमें वैक्सीनेशन के बाद पन्द्रह मिनट इंतज़ार करने की सख़्त हिदायत दी और फ़ीवर के लिए एनालजेटिक दवा की दो टेबलेट दिए।

वैक्सीनेशन के बाद मेरे सहचरी को हाथ पैरों में दर्द की शिकायत हुई पर मुझे कोई असर नहीं हुआ। मुझे लगा कि यह मेरे प्रतिदिन योग, आसन, ध्यान और व्यायाम का परिणाम है, जो मुझे हल्का सा भी फीवर नहीं महसूस हुआ।

वैक्सीन के तेरह घंटे के बाद मुझे कंपकंपी के साथ फीवर आ गया और क़रीब 36 घंटे तक रहा पर धीरे-धीरे यह कम होता गया। इस तरह आज हम वैक्सीन लगवाने के अपने और समाज के लिए आवश्यक दायित्व को पूर्ण कर चुके हैं।

-डॉ. अतुल गोयल
बैंकिंग, अर्थशास्त्र एवं वित्त विभाग,  बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी

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