नियमों के तहत किया गया शुल्क संशोधन
एनएचएआई ने बताया कि वार्षिक पास की फीस में यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के प्रावधानों के तहत की गई है। इन नियमों के अनुसार समय-समय पर टोल से जुड़े शुल्क में बदलाव किया जा सकता है। फास्टैग एनुअल पास का उद्देश्य नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को आसान और किफायती सुविधा देना है। इस योजना के जरिए वाहन मालिकों को बार-बार टोल भुगतान या रिचार्ज करने की परेशानी से राहत मिलती है।
56 लाख से ज्यादा लोग उठा रहे लाभ
यह सुविधा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। फिलहाल 56 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इस वार्षिक पास का फायदा उठा रहे हैं। यह पास विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो रोजाना या अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। यह पास केवल गैर-वाणिज्यिक निजी वाहनों के लिए उपलब्ध है, जिनके पास वैध फास्टैग लगा हुआ हो। इससे टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती और यात्रा अधिक तेज व सुविधाजनक हो जाती है।
1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर मिलेगा लाभ
फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग देशभर में मौजूद लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर किया जा सकता है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ कई प्रमुख एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। इस पास की वैधता एक वर्ष या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक होती है, जो भी पहले पूरा हो जाए। यानी नियमित यात्रा करने वालों के लिए यह व्यवस्था काफी सुविधाजनक मानी जाती है।
भुगतान के दो घंटे के भीतर सक्रिय हो जाता है पास
वार्षिक पास खरीदने या नवीनीकरण करने के बाद यह दो घंटे के भीतर सक्रिय हो जाता है। इसके लिए वाहन मालिकों को एकमुश्त भुगतान करना होता है। यूजर्स इस पास को Rajmarg Yatra App या एनएचएआई की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए आसानी से खरीद या रिन्यू कर सकते हैं।
स्वतंत्रता दिवस 2025 पर लॉन्च हुआ था पास
फास्टैग वार्षिक पास को 15 अगस्त 2025 को लॉन्च किया गया था। इसके बाद से ही यह योजना तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है। एनएचएआई का कहना है कि इस पास की बढ़ती मांग बताती है कि लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्मार्ट और डिजिटल टोल सिस्टम को तेजी से अपना रहे हैं।
क्या फायदा मिलता है यात्रियों को
फास्टैग वार्षिक पास के जरिए यात्रियों को कई फायदे मिलते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि बार-बार टोल भुगतान की झंझट खत्म हो जाती है। इसके अलावा टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।
