सरकार के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (26 फरवरी तक) में 10 रुपए के 439.40 करोड़, 20 रुपए के 193.70 करोड़ और 50 रुपए के 130.30 करोड़ नोट केंद्रीय बैंक द्वारा आपूर्ति किए गए। तुलना में पिछले वित्त वर्ष 2025 में 10 रुपए के 180 करोड़, 20 रुपए के 150 करोड़ और 50 रुपए के 300 करोड़ नोट वितरित किए गए थे। यह स्पष्ट करता है कि कम मूल्य के नोट लगातार आम जनता और व्यापारिक लेनदेन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
आरबीआई की भूमिका और डिजिटल भुगतान का बढ़ता महत्व
भारतीय रिज़र्व बैंक लगातार विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों की आवश्यकता का आकलन करता है और सरकार को नोटों के मिश्रण की सलाह देता है। मंत्री ने बताया कि कम मूल्यवर्ग के नोटों की मांग को नोटों और सिक्कों के मिश्रण से पूरा किया जाता है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 (31 दिसंबर, 2025 तक) में एनपीसीआई की रिपोर्ट के अनुसार, रुपे केसीसी कार्ड के माध्यम से कुल 3.72 लाख डिजिटल लेन-देन हुए, जिनका मूल्य 111.17 करोड़ रुपए था।
केंद्र सरकार के अनुसार, केसीसी कार्ड के तहत सभी पात्र किसानों को ऋण सीमा उनकी फसलों, खेती योग्य क्षेत्र और वित्तपोषण आवश्यकताओं के आधार पर तय की जाती है। डिजिटल माध्यम के जरिए छोटे मूल्य के लेन-देन भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हो रही है। पंकज चौधरी ने सदन में स्पष्ट किया कि नोटों की पर्याप्त आपूर्ति और डिजिटल भुगतान दोनों ही मिलकर देश में लेन-देन की निरंतरता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।
