मंत्रिमंडल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को गति मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री एवं व्यवसायों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। मदुरै हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप है, जिससे यह दक्षिण भारत में यात्रा और पर्यटन के लिए एक अहम केंद्र बन जाएगा।
2047 तक 350 हवाई अड्डों का लक्ष्य और विमानन क्षेत्र में नई दिशा
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि भारत में वर्तमान में 164 हवाई अड्डे संचालित हैं और सरकार का लक्ष्य 2047 तक लगभग 200 और हवाई अड्डे जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौती केवल हवाई अड्डे बनाने की नहीं, बल्कि “भारत में अधिक विमान कैसे लाए जाएं” की है।
नायडू के अनुसार, विमान निर्माण प्रणाली को तैयार करके भारत नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अगला बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। यह प्रणाली न केवल अगले 10-20 वर्षों में बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक विमान निर्माण और निर्यात केंद्र बनाने में भी मदद करेगी।
पिछले दस वर्षों में भारत में हवाई अड्डों की संख्या, यात्री संख्या और विमान बेड़े में दोगुनी वृद्धि हुई है। मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नागरिक उड्डयन सुधारों का परिणाम बताया। विशेष रूप से उड़ान योजना ने देश में विमानन क्षेत्र की गति और पहुँच बढ़ाई है।
नायडू ने यह भी कहा कि नागर विमानन मंत्रालय विमानन क्षेत्र में निवेश और निर्माण के लिए भारत के साथ साझेदारी करने वाले सभी लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे न केवल हवाई परिवहन सुविधा बढ़ेगी, बल्कि विमानन उद्योग में रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ेंगे।
मदुरै एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय दर्जे का महत्व
मदुरै एयरपोर्ट का अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से दक्षिण भारत में पर्यटन, व्यापार और धार्मिक यात्रा को नया impulso मिलेगा। यह कदम न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि स्थानीय व्यवसायों और पर्यटन उद्योग के लिए भी आर्थिक विकास का अवसर लेकर आएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के आने से मदुरै और आसपास के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
