कोरोना से जागरुक करने के लिए बुन्देलखण्ड में आल्हा आॅडियो वाॅयरल

आतंकवाद से भी भीषण खतरा बता रहा वाॅयरल आॅडियो
झांसी। एक ओर जहां कोरोना ने विश्व में अपनी दहशत का लोहा मनवाने के बाद भारत में भी दस्तक दे दी है। तो दूसरी ओर क्षेत्रीय गीतों के माध्यम से लोगों को इस वाॅयरस संक्रमण से जागरुक करने के लिए भी लोग कमर कसे हैं। बुन्देलखण्ड की प्रसिद्ध विधा आल्हा के रुप में वाॅयरल हुआ आॅडियो लोगों को अपनी ओर आकर्षित तो कर ही रहा है। साथ ही लोगों को जागरुक करने का भी काम कर रहा है। इसे आतंकवाद से भी भीषण खतरा बताते हुए इससे डरने के स्थान पर सावधान रहने को कहा जा रहा है। बीमारी के लक्षण और सुरक्षा के उपाय भी इसमें बखूबी बताए गए हैं।
देश की सबसे प्राचीनतम भाषा बुन्देलखण्डी करीब 1 लाख चैरासी हजार किमी क्षेत्रफल में बोली जाती है। इस भाषा को बोलने वालों की संख्या भी करीब 6 करोड़ है। एक ओर जहां कोरोना वाॅयरस के कोहराम से लोग दहशतजदा हैं। तो दूसरी ओर लोगों ने बुन्देलखण्ड की प्रसिद्ध गायन विधा आल्हाखण्ड के रुप में एक आॅडियो वाॅयरल किया है। आॅडियो में गायक लोगों को सावधान करते हुए रोग के लक्षण बता रहा है। खांसी,जुकाम और बुखार,नाक टपकना और श्वसन क्रिया में परेशानी आने पर सावधानी बरतने की बात करते हुए कहा गया है कि देश विदेश में इसने कोहराम मचा रखा है। गायक बता रहा है कि बात डरने की नहीं सावधान रहने की है। चीन देश से इसकी उत्पत्ति बताते हुए इसकी हर जगह चर्चा है। वैज्ञानिक भी हैरान हैं। अमेरिका में भी इमरजेंसी लगी है। हिन्दुस्तान भी खौफजदा है। इसका अत्याचार आतंकवाद से भी गहरा है। बताया जा रहा है कि इसका फिलहाल कोई इलाज नहीं है। केवल सावधानी ही सुरक्षा है। आॅडियो में यह भी बताया गया है कि अण्डा,मांस,मिठाई और ठण्डा का जलपान मना किया गया है। बच्चों को इनसे दूर रखने को कहा गया है। साबुन से हाथ धोने,पीड़ा होने पर स्वास्थ केन्द्र पर चैकअप कराने और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर न जाने की सलाह दी गई है। साथ ही उत्साह वर्धन करते हुए कहा गया है कि इसका डटकर मुकाबला करना है। हे इंसान इससे डरने की जरुरत नहीं है। इस आल्हाखण्ड की चर्चा चारों ओर है। साथ ही अधिकांश लोगों के व्हाट्सएप पर यह खूब धूम मचा रहा है।

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