कोरोना कहर: सड़कों पर ये कैसा आत्मनिर्भर भारत ?

ट्रक द्वारा मुंबई से फैजाबाद जाने वाले मजदूर का किराया साढ़े तीन हजार से अधिक

झांसी। कोरोना कहर ने देश के हालात बाकई बद से बदतर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की एक अरब 33 करोड़ जनता को इसके कहर से बचाना चाहते हैं। इसके साथ ही अपने देश के तमाम नगरों से रोजगार छोड़ अपने घरों में वापसी कर रहे मजदूरों को रोजगार दिलाने के लिए चिंतित हैं। उसके लिए वह प्रतिदिन कोई न कोई नई नीति का एलान करते हुए खजाने खोलने में लगे हैं। इसके इतर सड़कांे पर मजदूरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के नाम पर उनके साथ किराए के रुप में जमकर लूटपाट हो रही है। यही नहीं लूटपाट के साथ उनके अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है। सड़कों पर महाराष्ट्र से अपने घर लौट रहे बेबश मजदूरांे की आपबीती सुनकर पुलिस वाले भी दुखी हो गए। लोग यही कहते नजर आए कि क्या सड़कों पर भटकता,लुटता फिर रहा यही है आत्मनिर्भर भारत ?
कोरोना कहर के चलते पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र से वापस अपने गांव लौटने वाले मजदूरों की बाढ़ सी आ गई है। ये मजदूर विभिन्न राज्यों और अलग अलग जनपदों के हैं। सड़कों पर खड़े हुए एक ट्राला में बैठे करीब 100-150 मजदूरों को चिल चिलाती धूप में अपने सिरांे को गमछों और अपने थैलों से ढके हुए देखकर उनसे पूंछ लिया गया। वे सभी मुंबई से आए थे और फैजाबाद जा रहे थे। उनमें अरशद,विनोद,सलमान और ऐसे करीब डेढ़ सौ मजदूर थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे किराया देकर आए हैं तो उन्होंने बताया कि प्रति मजदूर उन्होंने 3 हजार 6 सौ रुपया किराया दिया है। यह कथन चैकाने वाला था। एक ट्राला में बैठे मजदूरों की संख्या करीब डेढ़ सौ थी। सभी फैजाबाद जा रहे थे। वहां से इसी शर्त के साथ ट्रक को बुक किया गया था। इस हिसाब से ट्रक मालिक के पास करीब 5 लाख 40 हजार रुपया एकत्र हुआ होगा।
एक सुपर फास्ट टेªन के एसी कोच से ज्यादा किराया
चैकाने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र में रोजगार छिनने के बाद दाने-दाने को मोहताज मजबूर मजदूरों के साथ ये कैसी ज्यादती? इसके बारे में किसी सरकार के पास कोई जानकारी या नीति नहीं है। एक सुपरफास्ट टेªन का मुंबई से फैजाबाद का किराया स्लीपर कोच का 675 रुपए,एसी तृतीय का 1770 रुपए,एसी द्वितीय का 2545 रुपए और एसी प्रथम का किराया 4320 रुपए है। इसके इतर एक अन्य टेªन का किराया स्लीपर का 625,एसी तृतीय का 1670,एसी द्वितीय का 2415 व एसी प्रथम का 4105 रुपए है। जबकि मजदूरों को इस दूरी को तय करने के लिए ट्रक में 42 डिग्री से. पर लू के थपेड़े झेलते हुए 3600 रुपए से 4000 रुपयों तक वसूला जा रहा है।
इन लुटेरों से कैसे लड़े सरकार ?
देश में इन कोरोना संकट के बाद सड़क पर सामाजिक कार्यकर्ताआंे की भीड़ दिखाई दे रही है। सरकार हर हाल में मजदूरों को उनके गंतव्य तक भेजने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए रोज नए नियमों के साथ उन पर अमल किया जा रहा है। लेकिन ऐसे में इन लुटेरों का भी अपना अलग राग अलापा जा रहा है। इससे निपटने के लिए सरकार के पास शायद कोई रणनीति नहीं है। यही नहीं मजदूरों की मजबूरी है कि उन्हें किसी तरह घर पहुंचना है। और उसी का ये लाभ लेने में जुटे हैं। यह भी कालाबाजारी जैसी हरकत है। इससे निपटने के लिए भी सरकारों को कुछ सोचना होगा।
पुलिस अधिकारी जानते हुए भी कुछ नहीं कर सकते
उपस्थित पुलिसकर्मियों का दबी आवाज में का कहना था कि वे इस बात को जानते हैं कि यह काम जोरों पर चल रहा है। लेकिन जानकर भी वे कुछ कर नहीं सकते। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह है या नहीं उन्हंे नहीं जानकारी।

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