कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों को जिलाधिकारी का अल्टीमेटम

कहा, सुधर जाओ नहीं तो एनएसए लगाकर जेल भेजे जाओगे
झांसी। कोरोना कहर से बचने के लिए सख्ती के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने 21 दिन के लाॅक डाउन की घोषणा की है। उसके बाद से विपरीत समय का लाभ लेने वाले जमाखोरों ने रोजमर्रा की वस्तुओं की जमाखोरी कर ओवर रेटिंग में सामान बेचना शुरु कर दिया है। इस बात की जानकारी होने पर जिलाधिकारी ने ऐसे दुकानदारों को अल्टीमेटम देते हुए एनएसए लगाकर जेल भेजने की हिदायत दे डाली। जिलाधिकारी के इस अल्टीमेटम ने लोगों को राहत की सांस लेने का मौका दिया है।
लाॅक डाउन के दूसरे दिन भी बाजार में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। लोग किसी तरह खाद्य सामग्री को भरने में लगे हुए हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए बड़े व थोक दुकानदारों ने जमाखोरी कर ओवर रेटिंग का कार्य शुरु कर दिया है। इसकी सूचना दो दिनों से लगातार जिलाधिकारी आन्द्रा वामसी को मिल रही थी। गुरुवार को उन्हें सूचना मिली कि आटा की भी कालाबाजारी की जा रही है। इस पर जिलाधिकारी पूरे दल बल के साथ सुभाष गंज जा पहुंचे और वहां खड़े होकर खाद्य सामग्री का वितरण कराया। उन्होंने तुरंत अपने स्टाॅफ से माईक मंगाकर सभी दुकानदारों को आगाह करते हुए बताया कि यह संकट की घड़ी है। हमें सभी को साथ लेकर चलना है। ऐसे में आप यदि इस परिस्थिति का लाभ उठाकर जमाखोरी कर कालाबाजारी करोगे तो यह बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके पास सभी की जानकारी पहुंच रही है कि कौन कितना ओवर रेट बेच रहा है। यह सूचना अब मिली तो आप समझ लीजिए आपके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा इसके लिए सब तैयार हो जाएं।
गौरतलब है कि आज लाॅक डाउन का दूसरा दिन है। 24 मार्च की शाम को जब प्रधानमंत्री ने 8 बजे टैलीविजन पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज रात 12 बजे से पूरा देश 21 दिन के लिए लाॅक डाउन किया जाता है। तो लोग हक्का बक्का रह गए। अफरा तफरी के बीच लोग दुकानों पर दौड़े। ताकि आगामी दिनों के लिए किराने का सामान और सब्जी एकत्र कर रखी जा सके। इसकी जानकारी होते ही दुकानदारों ने भी मौके का लुफ्त उठाया। आलम यह रहा कि 25-26 रुपए किलो बेचा जाने वाला आटा उस रात 60 रुपए प्रति किलो के हिसाब से तक बिक गया। सब्जियों के मूल्य भी रात मंे आसमान पर थे। 20 रुपए किलो वाला आलू 40 रुपए के पार हो गया। प्याज के कहने ही क्या थे। 15 से 18 रुपए किलो तक बिकने वाले प्याज को लोगों ने 40 रुपए तक बेच डाला। यही हाल फेस माॅस्क और सेनेटाइजर का भी था। 8-10 रुपए वाला माॅस्क लोगों ने 50 रुपए तक बेचा। जिस सेनेटाइजर को 35 रुपए में भी लोग लेने के लिए मोल भाव करते थे। दुकानदारों ने 70-80 रुपए के बीच बेच डाला। आज भी आलम कम नहीं हुआ है। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद भी सेनेटाइजर,माॅस्क और खाद्य सामग्री के मूल्य अपनी हैसियत से ज्यादा हैं। हालांकि सरकारी रेट पर वार्ड स्तर पर सब्जी भेजे जाने के कार्य की लोग सराहना भी कर रहे हैं।

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