विश्व दुग्ध दिवस: बलिनी ने बदल डाली बुन्देलखण्ड की महिलाओं की किस्मत

601 गांवों की 24 हजार से अधिक महिलाओं को मिला आत्मनिर्भर बनने का जरिया

योगेश पटैरिया

झाँसी : बलिनी दुग्ध उद्योग ने बुन्देलखण्ड की ग्रामीण महिलाओं की किस्मत बदल दी है। आज 601 गांवों की 24 हजार से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का जरिया मिला हुआ है। एक ओर जहां कोरोना के कहर ने लोगों को दो जून की रोटी के लिए मोहताज कर दिया। वहीं 5 जनपद की 24 हजार से अधिक परिवारों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लिए ग्रामीण महिलाएं लोगों के लिए आत्मनिर्भर प्रदेश का उदाहरण बन गई हैं।

लखनऊ में मार्च में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास खण्ड बबीना के गांव रसोई से महिलाओं के समूह बलिनी से जुड़ी रवि रंजना पाल के कार्यों की सराहना की थी। यह भी बताया कि महज एक वर्ष में बलिनी नामक दुग्ध उत्पादक संस्था ने 46 करोड़ का टर्न ओवर किया। यही नहीं इस दौरान इस कंपनी ने नेट प्राॅफिट के रुप में 2 करोड़ की कमाई भी की।

सम्मानित हुई रवि रंजना पाल ने समाज की महिलाओं को आगे आकर बलिनी से जुड़कर अपना व अपने परिवार की आर्थिक स्थिति व सामाजिक स्तर सुधारने की अपील की थी। बुन्देलखण्ड के झाँसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट के सभी 601 गांवों में ऐसी न जाने कितनी रवि रंजना पाल अपने व अपने गांवों के परिवारों के जीवन यापन का वीणा उठाए यह बता रही हैं कि आत्मनिर्भरता इसे ही कहते हैं।

गौरतलब है कि 7 दिसम्बर 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलिनी दुग्ध उत्पादन संस्थान का शुभारम्भ झाँसी से किया था। महज एक वर्ष में बलिनी से बुन्देलखण्ड के 7 में से 5 जिलों के 601 गांवों की कुल 24 हजार 180 महिलाएं जुड़कर लाभान्वित हो रही हैं। बलिनी में सभी वे महिलाएं हैं, जो गांव में बेहद खस्ता हाल में अपना जीवन बसर कर रही थीं। आज उनका स्तर दिनों दिन समाज में बेहतर होता जा रहा है। महिलाओं के इस समूह में करीब 3 हजार से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। जबकि अन्य महिलाएं समूह के बाहर से हैं।

कोरोना काल में जुड़े 101 गांव व 3 हजार से अधिक महिलाएं

बलिनी समूह के अधिकारी डा. ओपी सिंह की मानें तो जो आंकड़ा महिला दिवस पर 500 गांवों के 21 हजार परिवारों का था वह कोरोना जैसी विश्वव्यापी जानलेवा महामारी के दौरान बढ़कर 601 गांव व 24 हजार 180 परिवार की महिलाओं का हो गया है। इन 24 हजार से अधिक परिवारों को महिलाएं अपने दम पर चलाने का कार्य कर रही हैं। बलिनी द्वारा आत्मनिर्भर व महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का इससे बेहतर उदाहरण कुछ हो ही नहीं सकता है। उन्होंने बताया कि अब तक डेढ़ वर्ष में कुल 80 करोड़ का टर्न ओवर हुआ है। इसमें से 62 करोड़ रुपये किसान महिलाओं के खातों में डाला जा चुका है।

सशक्त महिलाओं के समूह का नाम है बलिनी

डा. ओपी सिंह ने बताया कि बलिनी से आशय सशक्त महिलाओं के समूह से है। पुरुषों को जिस प्रकार बली कहा जाता है। उसी प्रकार महिलाओं को बलिनी का नाम दिया गया है। उसी के आधार पर इस समूह का नाम रखा गया। वीरांगना की भूमि पर इस नाम के आधार पर महिलाओं का काम भी देखने को मिल रहा है।

इन 5 जनपदों में हो रहा संचालन

डा. ओपी सिंह ने बताया कि बलिनी के माध्यम से बुन्देलखण्ड के झाँसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट के अब 601 गांवों की महिलाओं को लाभ मिल रहा है। अभी बुन्देलखण्ड के ललितपुर व महोबा जिले को बलिनी से जोड़ा जाना है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन भी किया था। उन्होंने बताया कि कोरोना के चलते इसमें थोड़ी देरी हुई है। पत्राचार चल रहा है। जल्द ही ये दोनों जनपद भी बलिनी से लाभान्वित होंगे।

बलिनी

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