विशेष : महामारी, अंधेर नगरी और उसके चौपट राजा

कहानी (काल्पनिक) 

अंधेर नगरी और उसके चौपट राजा की अनेकों प्रचलित कहानियों में एक कहानी महामारी से सम्बंधित है।

एक बार अंधेर नगरी में छूत की बीमारी फैल गई, लोगों के एक-दूसरे के पास आने से ही एक-दूसरे तक फैल जाती थी। उसकी दवा बहुत मंहगी थी और सीमित मात्रा में थी। सरकार ने सारी दवाओं को ज़ब्त कर लिया और ऐलान कर दिया कि मुफ्त बाँटी जाएगी। दवाओं को जिसने भी अपनी सरकार के सुपुर्द नहीं किया, उनको बेइज्जत कर जेल में डाल दिया गया।

जो मरीज़ ठीक हो सकते थे उन्हें दवा दी ही नहीं गई। संक्रमण फैलने के पहले चरण में जो पहुँचे उन्हें बाद में आने को कह भगा दिया। दवा निकाली गई ऐसे मरीज़ों के नाम पर जो ठीक न हो सकें, उनका मरना तय हो और मरने के बाद गवाही न दे सकें कि उन्हें दवा तो दी ही नहीं गई। राजा के अधिकारियों ने यही बचाई गई-चुराई गयी दवा को चार गुना रेट पर बाज़ार में बेचना शुरू कर दिया।

नतीजा कि संक्रमण की दर कम दिखती रही क्योंकि जनता निजी अस्पतालों में ब्लैक मार्केट से दवा ख़रीदकर इलाज कराती रही। मृत्यु दर अधिक रही क्योंकि कालाबाज़ारियों को लोगों के मरने से फ़ायदा था। अनेकों लोग महंगी दवा ख़रीद न सके, इस कारण से मर गये। अनेकों लोग नक़ली दवा के कारण मारे गये।

मगर, राजा और उसके अधिकारियों की जेबें लबालब भर गईं। इसके बाद तय हुआ कि अब कुछ हो हल्ला करना चाहिए ताकि जनता को भी लगे कि हमें उनकी भारी चिंता है।

अब प्रजा राजा की प्रशंसा कर रही है। उसे लग रहा है कि राजा और उसके अधिकारियों ने हमें बचाने का पूरा प्रयास किया लेकिन, बीमारी ही इतनी ख़राब थी कि जिसके चलते हम अपनों को बचा नहीं पाए। जो भुक्तभोगी नहीं थे उन्हें पीछे की कहानी पता ही नहीं चली।

-डॉ. अतुल गोयल                                          

बैंकिंग, अर्थशास्त्र एवं वित्त विभाग, 

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी 

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